कैसे मुलायम की बहू बनीं अपर्णा, क्यों बढ़ा रही हैं अखिलेश की मुश्किलें, योगी के करीब!

Written by: November 1, 2018 6:32 pm

नई दिल्ली। राम मंदिर पर सुनवाई अगले साल जनवरी तक टलने के साथ ही देश में सियासी पारा भी काफी चढ़ गया है। ताजा मामला मुलायम के परिवार से जुड़ा है, चूंकि मुलायम का परिवार अब दो खेमों में बंट चुका है। पहला अखिलेश, तो दूसरा चाचा शिवपाल। और अब चाचा के पक्ष में खड़ी दिख रही हैं मुलायम की दूसरी पत्नी के बेटे प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव। जो बीजेपी के साथ ही योगी आदित्यनाथ की काफी करीबी मानी जाती हैं। योगी अक्सर अपर्णा की गौशाला में भी जाते रहते हैं।Aparna Yadavमुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव ने अयोध्या में राम मंदिर की पैरवी करते हुए कहा कि मंदिर बनना ही चाहिए। सत्तासीन पार्टी से मिलती-जुलती राय रखने के सवाल पर उन्होंने तपाक से कहा मैं किसी पार्टी नहीं, बल्कि राम के साथ हूं। छोटी बहू इससे पहले भी मुलायम परिवार में होने के कारण अपनी अलग सियासी राय रखती रही हैं, वो कई मौकों पर पीएम मोदी की तारीफ कर चुकी हैं।

कौन हैं अपर्णा बिष्ट यादव

उत्तराखंड की मूल निवासी अपर्णा साल 2003 में जब अपनी ‘भावी सास’ साधना गुप्ता यादव के जन्मदिन के मौके पर उनके घर पहुंची, तब किसी को अंदाजा भी नहीं था कि वक्त उन्हें इसी घर में लाने के ताने-बाने बुन रहा है। मधुर आवाज की मालकिन अपर्णा ने तब एक गीत गाया। किशोरी अपर्णा के सुरों और चेहरे के लावण्य ने हॉल में सबको बांध लिया, खासकर मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव को। धीरे-धीरे दोनों की करीबियां बढ़ती गई, और फिर दोनों ने एक होने का फैसला कर लिया।

अपर्णा यादव की शिक्षा

अपर्णा ने अंग्रेजी और राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया, जिसके बाद अपर्णा-प्रतीक साथ-साथ पढ़ने ब्रिटेन चले गए। अपर्णा ने मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल रिलेशन्स में पोस्ट ग्रेजुएट किया तो भावी पति ने लीड्स से एमएससी की। आखिरकार आठ सालों बाद 2011 में पारिवारिक मंजूरी से अपर्णा यादव परिवार की छोटी बहू बन गईं।दिसंबर 2011 में यूपी के सैफई गांव में दोनों की धूमधाम वाली शादी की चर्चा लंबे वक्त तक लोगों की जुबान पर रही, इसमें राजनीति, व्यापार और सिनेजगत की बड़ी-बड़ी हस्तियों ने शिरकत की। स्त्री अधिकारों पर काम करने वाले एनजीओ हर्ष फाउंडेशन में एक कैंपेन की ब्रांड एंबेसेडर अपर्णा अपने सामाजिक कार्यों की वजह से अपनी अलग छवि रखती हैं।अपर्णा हमेशा से अपने बेबाक बयानों और कामों के कारण चर्चा में रहीं। एक बार बाराबंकी में एक संवाददाता सम्मेलन में सपा से एकदम उलट बयान देते हुए अपर्णा ने कहा कि मेरा सुप्रीम कोर्ट पर पूरा यकीन है, मेरा मानना है कि राम मंदिर अयोध्या में बनना चाहिए।

और अब वर्तमान में सपा मुखिया अखिलेश यादव से अलग राय रखना और वो भी राम मंदिर जैसे अतिसंवेदनशील मुद्दे पर बहू के बयान को लेकर सियासी अटकलबाजियां भी होने लगीं। जब पूछा क्या कि वो क्या बीजेपी के साथ हैं। अपर्णा ने छूटते ही कहा- मैं राम के साथ हूं।

तीन तलाक पर सपा के खिलाफ, पीएम के साथ सेल्फी

अपर्णा मोदी सरकार के तीन तलाक फैसले के साथ, यानी सपा परिवार के खिलाफ खड़ी हो चुकी हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत का रोजाना रियाज करती अपर्णा के हाथ सुरों और वीणा पर जितने सधे हुए हैं, अपनी राजनैतिक शुरुआत में भी वे उतनी ही प्रयोगधर्मी नजर आती हैं। बेबाक बोलती हैं, वहीं करती हैं जो चाहती हैं। फिर बात चाहे राजनाथ सिंह की इफ्तार पार्टी में शामिल होने की हो या फिर पीएम मोदी के साथ सोशल मीडिया पर सेल्फी शेयर करने की।चूंकि 2019 लोकसभा चुनाव आने वाले हैं। ऐसे में छोटी बहू की तीखी और बेबाक बयानबाजी राजनैतिक गलियारों में भले चर्चा की आंच सुलगाए, खुद उसका प्रयोगधर्मी इतिहास ये तो साफ करता है कि उसका खानदानी राजनैतिक राह चुनने में थोड़ा कम ही यकीन हैं।

अगर अपर्णा के यही तेवर रहे, तो मिशन 2019 में वो कम से कम सपा को तो बड़ा नुकसान पहुंचा हीं सकती हैं, क्योंकि वो खुलकर चाचा शिवपाल और उनकी पार्टी को समर्थन कर चुकी हैं।