राज्यसभा नहीं जाएंगी मायावती, बसपा ने भीमराव अंबेडकर को बनाया उम्मीदवार

Written by: March 6, 2018 9:10 pm

नई दिल्ली। बसपा की तरफ से राज्यसभा सीट के उम्मीदवार के नाम की घोषणा के साथ ही इन अटकलों पर भी विराम लग गया है कि मायावती राजयसभा पद के लिए पार्टी की उम्मीदवार होंगी।   

बहुजन समाज पार्टी की तरफ से राज्यसभा के लिए अपने उम्मीदवार का नाम घोषित कर दिया गया है। पार्टी की तरफ से भीमराव अंबेडकर को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया है। भीमराव उत्तर प्रदेश के लखना से विधायक थे। इस नाम की घोषणा के बाद ही बसपा सुप्रीमो मायावती के राज्यसभा उम्मीदवार बनने की चर्चा पर विराम लग गया है।

राज्यसभा में आखिर क्यों नहीं जाना चाहती हैं मायावती

पहले से हीं इस बात की संभावना कम थी कि मायावती, जिन्होंने पिछले साल ही राज्यसभा से इस्तीफा दिया है वो इतनी जल्दी दोबारा फिर से उसी सदन में जाएंगी। इससे पहले भी वो राज्यसभा जाने से इनकार कर चुकी हैं। लालू यादव की पार्टी राजद ने भी जब उन्हें राज्यसभा भेजने के लिए प्रस्ताव दिया तो मायावती ने इनकार कर दिया था।

ऐसे में पार्टी की तरफ से बताया गया कि मायावती संसद में न जाकर पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के लिए नए सिरे से सियासी सफर पर निकलेंगी। 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए मायावती उन विकल्पों पर भी विचार कर रही हैं कि क्या 25 साल पुराने सपा-बसपा के गठबंधन को दोहराया जाए या नहीं?

आखिर किस मकसद से एक साथ आए बुआ और बबुआ

दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश की राजनीति में 25 साल बाद समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) दोबारा एक साथ आई है। लोकसभा उपचुनावों में बसपा ने सपा के उम्मीदवारों को समर्थन देने का एलान किया है, इससे सपा खेमे में खुशी है।

हालांकि, बसपा सुप्रीमो ने साफ किया है कि उनका गठबंधन स्थाई नहीं मौसमी है। ऐसा नहीं है कि इस मौसमी गठबंधन से सिर्फ सपा को फायदा हो सकता है। बसपा भी राज्यसभा चुनाव में इस गठबंधन का लाभ उठाने की फिराक में है।

किस समीकरण के तहत बसपा के उम्मीदवार पहुंचेंगे राज्यसभा

23 मार्च को राज्य की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं। विधान सभा के सियासी गणित के हिसाब से एक उम्मीदवार को जिताने के लिए 38 वोटों की जरूरत होगी। इस समय 403 सदस्यों वाली यूपी विधानसभा में सपा के 47 और बसपा के मात्र 19 विधायक हैं। यानी सपा के पास 9 सरप्लस वोट हैं। इस संख्या बल पर सपा एक उम्मीदवार को आसानी से राज्यसभा भेज सकती है मगर बसपा बिना साइकिल का सहारा लिए एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा सकती।

वहीं सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस ने किसी भी गठबंधन में शामिल होने से इनकार किया है लेकिन भाजपा विरोध के लिए कांग्रेस के 7 विधायक राज्यसभा चुनाव में बसपा के उम्मीदवार का समर्थन कर सकते हैं। इनके अलावा अजित सिंह की राष्ट्रीय लोक दल के एक विधायक का भी समर्थन बसपा प्रत्याशी को मिल सकता है। निर्दलीय राजा भैया और निषाद के एक विधायक भी हाथी को संसद के ऊपरी सदन में भेजने के लिए जोर लगा सकते हैं। इस तरह बसपा जरूरी 38 वोटों का जुगाड़ कर सकती है।