भीमा कोरेगांव हिंसा: गौतम नवलखा का हाउस अरेस्ट खत्म, बाकी चारों नजरबंद

Written by: October 1, 2018 7:27 pm

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को नक्सल समर्थक गौतम नवलखा की नजरबंदी खत्म कर दी है। हालांकि पुलिस नवलखा की ट्रांजिट डिमांड की मांग कर रही थी, लेकिन हाईकोर्ट ने ट्रांजिट डिमांड की याचिका को खारिज कर दिया। दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने ये आदेश सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद दिया है जिसमें नवलखा के साथ चार अन्य को अदालत ने चार सप्ताह के लिए और नजरबंद रखने का आदेश दिया था।दिल्ली हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा को नजरबंदी से रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि उनकी हिरासत कानून के तहत ‘असमर्थनीय’ है। न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की एक पीठ ने निचली अदालत के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें महाराष्ट्र पुलिस को नवलखा को पुणे ले जाने की इजाजत दी गई थी।बता दें कि पिछले महीने नवलखा को दिल्ली से काफी खोजबीन के बाद पुणे पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वहीं शीर्ष अदालत ने 29 सितंबर को पांचों कार्यकर्ताओं को फौरन रिहा करने की एक याचिका खारिज करते हुए कहा था कि महज असमति वाले विचारों या राजनीतिक विचारधारा में अंतर को लेकर गिरफ्तार किए जाने का यह मामला नहीं है।

कोर्ट ने कहा था कि आरोपी और चार हफ्ते तक नजरबंद रहेंगे, जिस दौरान उन्हें उपयुक्त अदालत में कानूनी उपाय का सहारा लेने की आजादी है। उपयुक्त अदालत मामले के गुण दोष पर विचार कर सकती है। महाराष्ट्र पुलिस ने पिछले साल 31 दिसंबर को हुए एलगार परिषद सम्मेलन के बाद दर्ज की गई एक प्राथमिकी के सिलसिले में 28 अगस्त को इन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था।

बता दें कि इस सम्मेलन के बाद राज्य के कोरेगांव भीमा में हिंसा भड़की थी। इन पांच लोगों में तेलुगू कवि वरवर राव, मानवाधिकार कार्यकर्ता अरूण फरेरा और वेरनन गोंजाल्विस, मजदूर संघ कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता नवलखा शामिल थे, जिन सभी को माओवादी विचारधारा का कट्टर समर्थक माना जाता है। साथ ही ये भी बता दें कि बाकी चार लोगों का अभी हाउस अरेस्ट खत्म नहीं हुआ है।