वाराणसी: खंडित शिवलिंगों की असलियत कुछ और ही निकली, जानिए हकीकत क्या है…

Written by: December 22, 2018 6:40 pm

नई दिल्ली। 19 दिसंबर को सोशल मीडिया पर वाराणसी में शिवलिंगों को लेकर अफवाह फैलाई गई थी। इस खबर में कहा जा रहा था कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण में मन्दिर तोड़कर मलबे में फेंका जा रहा है। खबर सोशल मीडिया पर फैलने के बाद अब इस राज से पर्दा उठ गया है। बता दें कि मलबे में मिले शिवलिंग और नन्दी की खंडित मूर्तियां काशी विश्वनाथ परिक्षेत्र की नहीं बल्कि मदनपुरा गणेश महाल के दूसरे जर्जर 200 साल पुराने मन्दिर में रखी खंडित मूर्तियां थीं।

वायरल वीडियो का कॉरिडोर से कोई वास्ता नहीं

इसको लेकर स्थानीय लोगों बातों को सुनें तो पता चलता है कि यह मंदिर काफी पुराना और खुद से जमीदोज हो चुका था। हालांकि मामला सोशल मीडिया पर गर्म हुआ तो पुलिस ने इस मामले में सक्रियता दिखाते हुए उन बातों को सामने ले आई जो सच थे। पुलिस ने पता लगाया कि मलबे से निकले शिवलिंगों के वायरल वीडियो का कॉरिडोर से कोई वास्ता नहीं अफवाह के तौर पर ऐसी बातें सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही हैं और माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही हैं।

क्या था मामला

बुधवार 19 दिसंबर को सोशल मीडिया पर इस तरह के शिवलिंगों को लेकर एक वीडियो बनाकर वायरल कर दिया गया था जिसमें कहा गया था कि विश्वविख्यात श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के बन रहे कॉरिडोर में मन्दिरों को तोड़कर शिवलिंगों और नन्दी के साथ बाकी अवशेषों को नालों और प्लांट के गड्ढों को भरने में किया जा रहा है। मामला इतना फैला कि इसको लेकर धर्मगुरु से लेकर स्थानीय लोग नाराज हो गए। जिसके बाद पुलिस बरामद मूर्तियों को थाने ले आई।

विवेचना करने के लिए कई टीमें जांच के लिए भी लगाई

इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई तो पुलिस ने धार्मिक मामला देख विवेचना करने के लिए कई टीमें जांच के लिए भी लगाई, तब जाकर बात सामने आई कि भटू जो रोहित नगर के उस प्लॉट में गड्ढे भरने का काम कर रहा था, वो बनारस के शिवाला, मदनपुरा और लंका के मलबा लेकर उस प्लांट में गिरा रहा था, जिसमें मदनपुरा के गणेश महाल के मकान के बगल के जर्जर मन्दिर से भी मलबा आया था।

इस बात की तहकीकात करने के लिए लोग मौके पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि जैसा शिवलिंग घटनास्थल पर मिला था, वैसे ही कई शिवलिंग जर्जर मन्दिर और आसपास की गलियों में पड़ा हुआ था। इस मामले में स्थानीय लोग बताते हैं कि बगल में निर्माण कार्य चल रहा था। हम लोगों के निवेदन पर यह मंदिर बन रहा था। अभी भी मन्दिर के पीछे कुछ टूटी मूर्तियां पड़ी हुई हैं जिससे ये माना जा रहा है कि आसपास के कई मकानों में अक्सर ऐसी मूर्तियां निकलती हैं जिन्हें लोग यहां लाकर रख देते हैं। वहीं एसएसपी आनद कुलकर्णी ने साफ कहा कि मलबे से मिले शिवलिंगों का कॉरिडोर से कोई सम्बंध नहीं है। जबरन अफवाह फैलाई गई थी। अब अफवाह फैलाने वालों पर करवाई की जाएगी।