केजरीवाल सरकार के रहते दिल्ली में देखिये क्या हो रहा है

Avatar Written by: October 10, 2018 3:47 pm

नई दिल्ली। नौ साल की प्रिया के सिर में गांठ है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय पर उसका इलाज नहीं हुआ तो इसका गंभीर परिणाम हो सकता है। एक चाय की दुकान चलाने वाले प्रिया के पिता राज राठौर ने अमर उजाला को बताया कि प्रिया के सिर में तेज दर्द रहता था। अक्सर वह बेहोश हो जाती थी। पहले तो उन्होंने बेटी को स्थानीय डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन कोई लाभ न होने पर दिल्ली के लोकनायक अस्पताल से संपर्क किया।जहां प्राथमिक स्तर पर जांच के बाद ही प्रिया को गंभीर परेशानी होने की जानकारी मिल गयी, इसके बावजूद ऐसी गंभीर स्थिति में भी दिल्ली के लोकनायक अस्पताल ने एमआरआई के लिए उसे मई 2020 का समय दे दिया, जो वाकई में सोचने पर मजबूर कर देता है। हद तो तब हो गई जब गंभीर बीमारी से जूझ रही प्रिया को यह बता दिया गया कि चूंकि वह दिल्ली की रहने वाली नहीं है, इसलिए उसका इलाज पहले नहीं किया जा सकता।Arvind Kejriwal and Ashish Khetanदिल्ली के अस्पतालों में हर टेस्ट फ्री कराने का दावा कराने के केजरीवाल सरकार के आदेश के बावजूद प्रिया को सीटी स्कैन की तारीख नहीं मिली। मजबूर पिता ने गाजियाबाद के सर्वोदय अस्पताल से 4,000 रुपये में सीटी स्कैन कराया। एक चाय बेचने वाले पिता के लिए यह एक बड़ी रकम थी, लेकिन बेटी के इलाज के लिए उसे सबकुछ करना पड़ा।

एमआरआई के लिए 2020 की तारीख

सीटी स्कैन से यह पता चल गया कि प्रिया के सिर में गांठ है जो उसके लिए खतरनाक साबित हो सकती है। गांठ की स्थिति की ज्यादा जानकारी के लिए डॉक्टर ने प्रिया का एमआरआई कराने का फैसला लिया और प्रिया को एमआरआई कराने के लिए भेज दिया। लेकिन इतने गंभीर मामले में भी अस्पताल के टेस्ट सेक्शन ने प्रिया को एमआरआई के लिए 14 मई 2020 की तारीख दे दी।

राज राठौर के मुताबिक उसने अस्पताल के लोगों से खूब मिन्नतें की और टेस्ट जल्दी कराने की विनती की लेकिन किसी पर उसका कोई असर नहीं हुआ। अंत में, अपने एक परिचित के माध्यम से वह केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के पास पहुंचे जहां उन्होंने एक सिफारिशी पत्र लिख दिया। मंत्री के पत्र के बाद प्रिया का लगभग महीने भर बाद टेस्ट हो सका।Mukhtar abbas Naqvi

फिर मिली तीन महीने बाद की तारीख

प्रिया की जांच के लिए डाक्टरों ने एक बार फिर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लिखा है। लेकिन सीटी स्कैन और एमआरआई की तरह उन्हें इस बार भी तीन महीने बाद दिसंबर की तारीख मिली है। राज का कहना है कि हर बात पर अस्पताल के कर्मचारी उन्हें बता देते हैं कि चूंकि वह दिल्ली का नहीं है, इसलिए उनकी बेटी का इलाज पहले नहीं हो सकता। यह सरकार का आदेश है और उसे मानने के लिए वे बाध्य हैं।