भारत ने दिया चीन को झटका ! चीन को चुनौती देते हुए भारत ने…

Avatar Written by: March 12, 2018 9:50 am

नई दिल्ली। भारत में रविवार को इंटरनेशनल सोलर अलायंस (आईएसए) के पहले सम्मेलन का आयोजन किया गया। 121 देशों को एक साथ लाने वाला यह आयोजन हाल के समय का सबसे बड़ा कूटनीतिक आयोजन है।इस आयोजन के बाद से माना जाने लगा है कि पूरी दुनिया में गैरपरंपरागत ऊर्जा स्रोतों को अपनाने की मुहिम जिस तरह तेज हुई है, उसमें इस सम्मेलन ने भारत को दुनिया में सोलर पावर की राजधानी के तौर पर स्थापित किया है।इसे लेकर आईएसए यानि इंटरनेशनल सोलर अलायंस का सचिवालय भी गुरुग्राम में बनाया गया है। एक उपलब्धि यह भी है कि भारत को इस गठजोड़ में फ्रांस जैसे उन्नत सोलर तकनीक वाले देश का सहयोग मिला है। विदेश मामलों के संयुक्त सचिव (यूरोप पश्चिम) के नागराज नायडू ने यह भी बताया कि अमेरिका और चीन भी आईएसए में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन समझौते पर उनके हस्ताक्षर अभी बाकी हैं।Emmanuel Macron & PM Narendra Modiनई दिल्ली में रविवार को आयोजित इंटरनेशनल सोलर अलायंस की पहली बैठक की सह-अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों ने की। अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने देश में सौर बिजली परियोजनाओं को सस्ता कर्ज उपलब्ध करवाने पर जोर दिया। पीएम ने देश में वर्ष 2022 तक अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन 175 गीगावॉट तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई। इससे भारत अक्षय ऊर्जा के विस्तार में यूरोपीय संघ से आगे निकल जाएगा। इसके लिए देश में सौर प्रौद्योगिकी मिशन शुरू किया जाएगा।सम्मेलन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों ने आईएसए को वास्तविकता बनाने के लिए भारत एवं अन्य देशों की सराहना की। मोदी की उपस्थिति में मैक्रों ने कहा, ‘प्रधानमंत्री जी, आपने एक स्वप्न देखा था और हमने इसे कर दिखाया। दो साल पहले यह मात्र एक विचार था। आज यह एक बड़ा परिवर्तन है।’PM Narendra modi and Emmanuel Macronयह अलायंस सोलर प्रॉजेक्टों को वित्तीय संसाधन दिलवाने में मदद करेगा। इससे सस्ते सोलर इक्विपमेंट के बाजार में चीन का दबदबा खत्म होगा। दुनियाभर में यह राय जोर पकड़ रही है कि चीन गरीब देशों को विकास के नाम पर कर्ज के जाल में फंसा रहा है। इस बैठक में सौर ऊर्जा के धनी 40 से ज्यादा देशों की मौजूदगी थी, लेकिन इनमें कई आर्थिक रूप से गरीब हैं।

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पीएम मोदी के दस मंत्र

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 10 बिंदु प्रस्तुत किए। सम्मेलन के पूर्ण सत्र में मोदी ने कहा कि प्रोद्यौगिकी, आर्थिक स्रोत, भंडारण प्रोद्यौगिकी, कर्मचारी निर्माण और नवोन्मेष के विकास और मौजूदगी के लिए पूरा पारितंत्र होना चाहिए।

 उन्होंने कहा, “आगे के लिए हम सबको सोचना होगा और मेरे पास इसकी कार्य योजना के लिए 10 बिंदु हैं जिन्हें मैं आपको बताऊंगा।”

PM Narendra Modi

उन्होंने कहा, “हमें सबसे पहले सौर ऊर्जा की सस्ती और सरल उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। सभी ऊर्जाओं में सौर ऊर्जा का अनुपात बढ़ना चाहिए और नवोन्मेष को प्रेरित किया जाना चाहिए जिससे हमारी विभिन्न जरूरतें पूरी हो सकें।”

प्रधानमंत्री ने सौर परियोजनाओं के लिए रियायती वित्तपोषण को कम जोखिम पर करने का आवाह्न किया। उन्होंने कहा कि शीघ्र समाधान के लिए नियामक पहलुओं और मानकों का विकास होना चाहिए।

विकासशील देशों में बैंक योग्य सौर परियोजनाओं के लिए परामर्श समर्थन बढ़ाया जाना चाहिए।

मोदी ने कहा, “हमें सहभागिता और समग्रता बढ़ाने के लिए काम करना होगा। हमें स्थानीय परिस्थितियों और कारकों को ध्यान में रखते हुए उत्कृष्ट केंद्रों का जाल बिछाना होगा। हमें अपनी सौर ऊर्जा की नीतियों के विकास पर पूर्ण रूप से ध्यान देना होगा जिससे संयुक्त राष्ट्र के समग्र विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को पा सकें।”

मोदी ने गुरुग्राम स्थित आईएसए सचिवालय को मजबूत और पेशेवर बनाने का आवाह्न किया।

साल 2015 में मोदी और फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वां ओलाद ने आईएसए की शुरुआत की थी। आईएसए को सौर संसाधन सम्पन्न देशों को उनकी विशेष ऊर्जा जरूरतें बताने और सहयोग के लिए एक मंच के तौर पर स्थापित किया गया था।

आईएसए कर्क और मकर रेखा के ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्र में आने वाले सभी 121 देशों के लिए खुला है।

Prime Minister Narendra Modi

प्रधानमंत्री ने कहा, “121 देशों में से 61 देशों ने गठबंधन अपना लिया है और 32 देशों ने ढांचागत समझौते को मंजूरी दे दी है। लेकिन इस गठबंधन में हमारे सबसे बड़े सहयोगी सूरज भगवान हैं जो प्रकाश देते हैं और हमारी समस्याओं के लिए समाधान प्रदान करते हैं।”

चार दिन की भारत यात्रा पर आए मैक्रों के साथ मोदी ने सम्मेलन की सह अध्यक्षता की।

उन्होंने कहा, “साल 2022 तक हम 175 गीगावाट अक्षय ऊर्जा का उत्पादन कर लेंगे जिसमें 100 गीगावाट सौर ऊर्जा होगी। सौर ऊर्जा स्थापित कर हम पहले ही 20 गीगावाट ऊर्जा का लक्ष्य प्राप्त कर चुके हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत ने आईएसए सचिवालय की स्थापना के लिए आईएसए कोष में 62 अरब डॉलर का सहयोग किया है।

उन्होंने बताया कि भारत मेंआईएसए के सदस्य राज्यों में 500 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

उन्होंने कहा, “15 विकासशील देशों में 27 अन्य सौर परियोजनाओं के लिए भारत ने 1.4 अरब डॉलर का सहयोग दिया है।”

उन्होंने कहा, “यह घोषणा करते हुए मुझे खुशी हो रही है कि सौर फासले को पूरा करने के लिए भारत सौर प्रोद्यौगिकी मिशन शुरू करेगा।”

Support Newsroompost
Support Newsroompost