जानें- भारत के वो मंदिर, जहां पुरुष प्रवेश नहीं कर सकते

Avatar Written by: September 28, 2018 2:36 pm

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसले में केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी दे दी। कोर्ट ने कहा कि महिलाओं का मंदिर में प्रवेश न मिलना उनके मौलिक और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने अपने फैसले में 10 से 50 वर्ष के हर आयुवर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश को लेकर हरी झंडी दिखा दी है।

Supreme Court

अत्तुकल भगवती मंदिर- अत्तुकल भगवती मंदिर केरल में स्थित है। इस मंदिर में महिलाओं की पूजा होती है। इस मंदिर ने पोंगल त्योहार मनाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था। इसमें तीस लाख महिलाओं ने हिस्सा लिया था। पुरुषों को मंदिर में प्रवेश करने की इजाजत नहीं है, जहां त्योहार के दौरान महिलाओं की सबसे बड़ी सभा देखने को मिलती है।

Attukal Bhagavathy Temple

भगवती मंदिर- कन्याकुमारी में बने हुए इस मंदिर में मां भगवती दुर्गा के कन्या रूप की पूजा होती है। पुराण के अनुसार यहां देवी सती के रीढ़ की हड्डी गिरी थी। उन्हें संन्यास की देवी भी माना जाता है। इसी वजह से केवल संन्यासी पुरुष मंदिर के दरवाजे तक आ सकते हैं। वहीं शादीशुदा पुरुषों के आने पर रोक है।

Bhagavathi Temple

माता मंदिर- एक निश्चित अवधि के दौरान बिहार के मुजफ्फरपुर में बने इस मंदिर में प्रवेश वर्जित हो जाता है। यह नियम इतने सख्त हैं कि पुरुष पुजारी को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता है। उस अवधि के दौरान केवल महिलाएं यहां आ सकती हैं।

chakkulathukavu temple

चक्कूलाथूकावु मंदिर- केरल के इस मंदिर में देवी भगवती की पूजा होती है। यहां ‘नारी पूजा’ नामक वार्षिक अनुष्ठान होता है जिसमें पुरुष पुजारी उन महिला भक्तों के चरण धोते हैं, जिन्होंने 10 दिनों से व्रत रखा होता है। इस दिन को धनु कहते हैं। नारी पूजा के दौरान केवल महिलाओं को मंदिर के अंदर जाने की इजाजत होती है।

संतोषी मां- संतोषी मां का व्रत केवल महिलाएं या अविवाहित लड़कियां ही रख सकती हैं। इस अवधि के दौरान वह खट्टे फल या आचार नहीं खा सकतीं। पुरुषों को मंदिर में आने की इजाजत है लेकिन शुक्रवार के दिन मंदिर के अंदर उनका प्रवेश वर्जित होता है।

Brahma Temple

ब्रह्मा मंदिर- 14वीं शताब्दी में राजस्थान के पुष्कर में यह मंदिर बनाया गया था। इस मंदिर में शादीशुदा पुरुषों का आना सख्त मना है। यह पूरे विश्व में बना हुआ ब्रह्मा का अकेला मंदिर है।

Trimbakeshwar Shiva Temple

त्र्यंबकेश्वर मंदिर- महाराष्ट्र के नासिक में स्थित इस मंदिर का गर्भगृह भगवान शिव को समर्पित है। यहां के गर्भगृह में पहले महिलाओं के जाने पर रोक थी। जिसके बाद 2016 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि यदि महिलाओं का जाना वर्जित है तो पुरुषों के जाने पर भी प्रतिबंध लगे। इसके बाद से गर्भगृह में पुरुषों का जाना मना हो गया है।

Kamakhya Temple

कामरुप कामाख्या मंदिर- असम में स्थित इस मंदिर में माता की माहवारी का उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान यहां पुरुषों के प्रवेश पर रोक रहती है। इस दौरान केवल महिला संत और संन्यासिन मंदिर की पूजा करती हैं। इस मंदिर में माता सती के माहवारी कपड़े को बहुत शुभ माना जाता है और इसे भक्तों के बीच बांटा जाता है।