जयदेव गल्ला के संसद वाले बयान पर हुआ बड़ा खुलासा, इसके बाद शायद वो ऐसी भूल दोबारा ना करें !

Written by: July 21, 2018 6:28 pm

नई दिल्ली। मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर शुक्रवार को पूरे दिन सदन में बहस चली। इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव पर हुई वोटिंग में सरकार के पक्ष में 325 मत पड़े जबकि सरकार के विरोध में 126 मत पड़े। इस तरह मोदी सरकार ने संसद में अपना विश्वासमत कायम रखा और सरकार को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ।Jaydev galla TDP

इससे पहले मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सदन को आंध्र प्रदेश की क्षेत्रीय पार्टी तेलगुदेशम पार्टी ने दिया था। जिसे लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने स्वीकार कर लिया था। तेलगुदेशम पार्टी के नेता ने सदन में इस प्रस्ताव पर बोलने की शुरुआत भी की थी। टीडीपी इससे पहले सरकार की सहयोगी पार्टी रही है लेकिन हाल ही में पार्टी ने सरकार से अलग होने का फैसला किया था।

टीडीपी की मांग सरकार से आंध्र प्रदेश को स्पेशल राज्य का दर्जा देने का था। जिसको लेकर सरकार से समर्थन वापसी का ऐलान किया गया था। लेकिन ऐसा लगने लगा है कि तेलगु देशम पार्टी ने इस तरह से अपने पैर कुल्हाड़ी मार ली है।

टीडीपी की तरफ गुंटूर से सांसद जयदेव गल्ला ने अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में बोलने की शुरुआती की थी और जमकर मोदी सरकार को अपने निशाने पर लिया था। उन्होंने मोदी सरकार से आंध्रप्रदेश को स्पेशल राज्य का दर्जा ना देने को लेकर घेरने की कोशिश की। लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो सके। लोगों ने सोशल मीडिया पर जमकर जयदेव गल्ला को अपने निशाने पर लिया और उन्हें मार्च 12, 2017 के उस बयान की याद दिलाई जब उन्होंने कहा था कि स्पेशल पैकेज मिलना स्पेशल राज्य का दर्जा मिलने से बेहतर है। जबकि अब वही जयदेव कल संसद में बोलते हुए कह रहे थे कि उनके लिए स्पेशल राज्य के दर्जे से कम कुछ भी मायने नहीं रखता है।

पीएम मोदी ने जयदेव गल्ला के इस सवाल का कल बेहतरीन जवाब सदन में दिया। प्रधानमंत्री ने टीडीपी पर हमला बोलते हुए कहा, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने स्वयं एक पैकेज को स्वीकार करते हुए वित्त मंत्री का धन्यवाद दिया था। हम हर कमिटमेंट को पूरा करना चाहते थे। लेकिन, तेदेपा ने अपनी विफलता छुपाने के लिए एनडीए छोड़ने का फैसला किया।

मैंने उस वक्त खुद चंद्रबाबू नायडू को फोन किया था। मैंने उनसे कहा था कि आप वाईएसआर के जाल में फंस रहे हो। आप वहां की स्पर्धा में किसी हालत में बच नहीं पाओगे। झगड़ा वहां का है, उपयोग सदन का हो रहा है। आंध्र की जनता भी इस अवसरवादिता को देख रही है। कोई भी विशेष पैकेज देते हैं तो उसका प्रभाव दूसरे क्षेत्रों पर भी पड़ता है। इसी सदन में तीन साल पहले वीरप्पा मोइली ने कहा था कि आप इस तरह कैसे असामनता दो राज्यों के बीच ला सकते हैं?देखिए इससे पहले कैसे टीडीपी के नेता कह रहे थे स्पेशल पैकेज हीं सही है।