जिस चीज़ की जरूरत भारतीय रेलवे को बहुत पहले से थी उसको लेकर मोदी सरकार की तरफ से लगातार रेलवे के…

Avatar Written by: March 5, 2018 9:05 pm

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में विकास की कई नई इबारत लिखी है। इस सब के बीच कुछ ऐसे भी काम किए गए हैं जो मिल का पत्थर साबित हो गए हैं। ये सब कुछ रेलवे के तेज विकास के परिचायक हैं जिसकी जरूरत भारतीय रेलवे को बहुत पहले से थी। सरकार की तरफ से लगातार रेलवे के विकास को बल दिया जा रहा है। ताकि यात्रियों की सुविधा का खासा ख्याल रखा जा सके और यात्रा के दरम्यान भारतीय रेलवे उनको वह सभी सुविधा मुहैया कराए जिसकी चाह वह भारतीय रेल से रखते हैं।

PM MODI with Rail minister Piyush Goyal

हाल ही में सरकार द्वारा सैकड़ों ट्रेनों की गति में वृद्धि के साथ कई स्टेशनों को पूर्णतः महिलाओं द्वारा स्वचालित स्टेशनों में बदलना इसके साथ हीं कई बड़े स्टेशनों पर फ्री वाई-फाई की सुविधा यात्रियों को मुहैया कराना से लेकर ट्रेनों में उचित साफ सफाई के साथ लोगों की सुरक्षा, संरक्षा और समय पालन जैसे अपने उद्देश्यों पर खरा उतरने की रेलवे ने पूरी कोशिश जारी रखी है।

इसी क्रम में रेलवे ने कई ऐसे काम भी किए हैं जिसकी वजह से भारतीय रेलवे की पहचान विश्व के बेहतरीन रेल सेवाओं के रूप में होना संभव हो पाया है। इसमें से कुछ खास हैं जिसका विवरण देना जरूरी है।

डेबिट कार्ड से एक लाख रुपए तक टिकट बुक कराने पर मर्चेंट चार्ज नहीं

रेल मंत्रालय ने यात्रियों को बड़ी राहत दी है। टिकट बुक करने पर अब यात्रियों से एमडीआर चार्ज नहीं वसूला जाएगा। रेलवे ने यह सुविधा सिर्फ एक लाख रुपए तक की बुकिंग के लिए दी है। इस संबंध में वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने 26 फरवरी को बैंकों को निर्देश जारी कर दिया है। वहीं रेल मंत्रालय ने अपने अधिकारिक बयान में कहा, एमडीआर चार्ज ऑनलाइन और टिकट काउंटर दोनों माध्यमों से टिकट बुक करने पर दी जाएगी। एमडीआर शुल्क नहीं लिए जाने को लेकर रेलवे बोर्ड से निर्देश आ गया है। इसमें डेबिड कार्ड से एक लाख रुपए तक का रेल टिकट खरीदने पर ही यह सुविधा लागू होगी।

एक लाख रुपए तक लेनदेन के मूल्य के लिए डेबिट कार्ड के माध्यम से किए गए भुगतान पर रेलवे टिकट (टिकट काउंटरों के साथ-साथ आईआरसीटीसी टिकट वेबसाइट पर) बुकिंग करने के लिए यात्रियों के लिए वैटेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क नहीं लगाए जाएंगे।

इसके अलावा भारतीय रेल ने अनारक्षित टिकट प्रणाली (यूटीएस) के माध्यम से जारी अनारक्षित टिकटों पर स्थानीय भाषा में टिकट के विवरण छापने की सुविधा शुरू की है। पॉयलेट प्रोजेक्ट के रुप में पहला विवरण कन्नड़ में छपेगा। परीक्षण के तौर पर दक्षिण-पश्चिमी रेलवे के मैसूर, बंगलुरू और हुबली स्टेशनों पर 1 मार्च से एक काउंटर से टिकट जारी किए जा रहे हैं। वहीं 2 मार्च से इस सुविधा का विस्तार कर्नाटक के सभी स्टेशनों पर कर दिया जाएगा। वहीं इसके बाद इसे देश के सभी रेलवे स्टेशनों पर शुरु करने की योजना है।

भारतीय रेलवे ने किया ऐसा काम जिसके जरिए रचा इतिहास

भारतीय रेलवे ने ऐसा काम किया है जो इससे पहले कभी भी नहीं हुआ है। इस काम के जरिए रेलवे ने इतिहास रच दिया है। भारतीय रेलवे ने स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके दो माह में डीजल लोको को इलेक्ट्रिक लोको में परिवर्तित कर दिया है। इतने कम समय में ऐसा करके रेलवे ने सच में इतिहास रच दिया है।टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट की मानें तो उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भारतीय रेलवे के लोकोमोटिव उत्पादन इकाई ने देश में विकसित प्रौद्योगिकी का उपयोग करके डीजल लोकोमोटिव को इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में परिवर्तित करके इतिहास बना दिया है।उत्पादन इकाई के अधिकारियों ने कहा है कि यह पहली बार है जब डीजल लोकोमोटिव को दुनिया में कहीं भी इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में इतने कम समय में बदल दिया गया हो। परियोजना के कामकाज के अधिकारियों ने बताया कि, दो महीने की एक छोटी सी अवधि में इसे पूरा किया गया है।एक अधिकारी ने कहा, “इस परियोजना का काम 22 दिसंबर, 2017 को शुरू किया गया था और इस लोकोमोटिव यूनिट का सफलतापूर्वक संचालन इस नए परिवर्तन के साथ 28 फरवरी 2018 को शुरू कर दिया गया।”

भारतीय सेना ने रेलवे के लिए किया ऐसा काम जो इससे पहले कभी नहीं किया

मुंबई के एलफिंस्टन रोड स्टेशन के फुटओवर ब्रिज की अगर बात करें तो क्या तस्वीर सामने आती है? एक टूटा-फूटा ब्रिज और उस पर पिछले साल हुई भगदड़ में कई लोगों की जान जाने का दर्दनाक नजारा। ऐसी ही कुछ छवि जनमानस के बीच एलफिंस्टन ब्रिज को लेकर बन गई थी।

लेकिन अब यह बीते दिनों की बात है। देश की बहादुर सेना ने अब इस तस्वीर को बदल डाला है। एलफिंस्टन ब्रिज का नजारा अब एकदम बदला हुआ है। एलफिंस्टन ब्रिज अब चमक रहा है। सेना के अथक प्रयास और लगन से इसकी सूरत बदल चुकी है। इतना ही नहीं यह कमाल सेना ने रिकॉर्ड 117 दिनों में कर दिखाया है।

हादसे में करीब 23 लोगों की जान जाने के बाद सेना को एलफिंस्टन रोड स्टेशन के इस ब्रिज को फिर से निर्मित करने का जिम्मा सौंपा गया था और सेना ने इसे रिकॉर्ड समय में संवार दिया। तस्वीरों में देखकर तो आपको अंदाजा लग ही जाएगा लेकिन सेना के कमाल का और भी सही अंदाजा तो इसे इस्तेमाल करने से लगेगा।

जानकारी के अनुसार, इस फुटओवर ब्रिज के पुनर्निमाण के बाद अब उद्घाटन के लिए किसी वीआईपी की जगह एक आम नागरिक को ही चुना गया है।

बुलेट ट्रेन परियोजना में उल्लेखनीय मील का पत्थर साबित हुई यह पहल 

महाराष्ट्र सरकार रेलवे को मुम्बई में बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में उच्च स्पीड रेल टर्मिनल बनाने के लिए भूमि प्रदान कर दिया है। इतने कम समय में किसी सरकार के द्वारा इस तेजी से काम किया गया है।

मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के लिए, बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) पर टर्मिनल के लिए जमीन के दस्तावेज को राष्ट्रीय महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल निगम लिमिटेड को सौंप दिया। यह विकास बोईसर और विरार के लोगों के लिए आने वाले समय में मिल का पत्थर साबित होनेवाला है।

वहीं इंडियन रेलवे देश के सभी प्रमुख शहरों को कनेक्ट करने के लिए एक हाई-स्पीड ट्रेन कॉरिडोर बनाने की योजना का जल्द ऐलान करेगा। इसके निर्माण पर 10 लाख करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। सरकार के भारतमाला हाइवेज डिवेलपमेंट प्रोग्राम की तर्ज पर बनाया जाने वाला यह कॉरिडोर लगभग 10,000 किलोमीटर लंबा होगा।

Support Newsroompost
Support Newsroompost