राहुल पर बड़ा आरोप, भूल गए अपने ‘दत्तक पुत्र’ को, कौन है वो बच्चा ?

Avatar Written by: September 19, 2018 1:41 pm

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मध्यप्रदेश दौरे के बाद एक बड़ा विवाद भी सामने आया है, जो राजनीति से जुड़ा भले ना हो पर इस पर हो रही राजनीति बेहद दिलचस्प हो गयी है। भाजपा राहुल को घेरते हुए आरोप लगा रही है कि वे भोपाल आए लेकिन अपने दत्तक पुत्र को ही भूल गए। इस आरोप के बाद मध्यप्रदेश में वो बच्चा फिर सुर्खियों में आ गया, जिसको राहुल गांधी ने स्कूल में एडमिशन कराने और पढ़ाई खर्च उठाने का भरोसा दिलाया था।बता दें कि हाल में ही राहुल के भोपाल दौरे के दौरान कौशल शाक्य उनसे मिलने की कोशिश करता रहा, पर राहुल की सुरक्षा में तैनात एसपीजी ने उसे राहुल गांधी से नहीं मिलने दिया। दरअसल, यही वो बच्चा है, जिसकी पढ़ाई-लिखाई को पूरा जिम्मा राहुल गांधी ने उठाया था। जानकारी के मुताबिक, 2013 में जब राहुल गांधी भोपाल आए थे तब सड़क किनारे अखबार बेचने वाले इस बच्चे की शिक्षा और पढ़ाई का खर्च उठाने का वायदा किया था। फिर राहुल के निर्देश के बाद ही कांग्रेस ने इस बच्चे को ‘गोद’ ले लिया था।Rahul Gandhi Jyotiradtyaबीजेपी मध्यप्रदेश के प्रवक्ता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि राहुल गांधी एक अखबार बेचने वाले गरीब बच्चे से किया वायदा भी परा नहीं कर सके। राहुल गांधी का रोड शो एक पूरा प्रायोजित कार्यक्रम था, कार्यक्रम में जो प्रश्न भी आए, वो पूछे ही नहीं गए थे। साथ ही कहा कि राहुल गांधी जहां भी गए कांग्रेस की सरकार नहीं बन पाई। सीएम शिवराज सिंह के नेतृत्व में बीजेपी लगातार जीत रही है और हम चौथी बार भी सरकार बनाएंगे।KOSHAL 1

जानें पूरा मामला-

2013 में जब राहुल गांधी भोपाल आए थे, तब वहां सड़क किनारे अखबार बेचते हुए नाबालिग कौशल शाक्य पर उनकी नजर पड़ी थी। जिसके बाद राहुल ने बच्चे से बातें कीं और पूछा कि तुम पढ़ने जाते हो। तो उस बच्चे ने कहा कि मैरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि वो स्कूल जा सके। इस पर राहुल ने अपनी पॉकेट से एक हजार रुपए का नोट निकाला और उसे देने लगे, लेकिन उस बच्चे ने सिर्फ एक रिपए मांगा। वो भी अखबार की कीमत का एक रुपया मांगा। उसने एक हजार रुपए लेने से इनकार कर दिया।

राहुल को उस बच्चे की खुद्दारी बेहद पसंद आई। उन्होंने कहा कि बच्चे की पढ़ाई का खर्चा वे खुद उठाएंगे। हर माह एक हजार रुपए पढ़ने के लिए उस बच्चे को पहुंचाने का वायदा किया गया। राहुल गांधी के निर्देश पर बड़े नेताओं ने उस बच्चे का एडमिशन राजधानी के एक स्कूल में करवा दिया। एक साल तक तो एक हजार रुपए मिलते रहे, लेकिन बाद में यह पैसा आना बंद हो गया।Union Minister Smriti Iraniजब यह खबर मानव संसाधन विकास मंत्रालय की तत्कालीन मंत्री स्मृति ईरानी तक पहुंची तो उन्होंने उस बच्चे का एडमिशन केंद्रीय स्कूल में करवा दिया। जिस पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध किया।

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