राज्यसभा चुनावः अमित शाह की रणनीति से भाजपा पड़ रही मायावती पर भारी

Written by: March 21, 2018 3:56 pm

नई दिल्ली। यूपी की 10 सीटों पर होनेवाले राज्यसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए उनके सहयोगी दलों ने मुश्किलें खड़ी करने की कोशिश की। जबकि भाजपा के 8 उम्मीदवारों का और सपा के एक उम्मीदवार का राज्यसभा में पहुंचना तो तय है। लेकिन मामला 10 वीं सीट के लिए है जिस पर मायावती ने सपा के समर्थन से अपना उम्मीदवार उतारा है जबकि भाजपा भी इस सीट को जीतने के लिए हरसंभव कोशिश में लगी है।

इस बीच खबर यह आ रही थी कि भाजपा के यूपी में सहयोगी दल सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी(सुभासपा) के नेता ओमप्रकाश राजभर और अपना दल की अनुप्रिया पटेल गठबंधन से नाराज थे। लेकिन अमित शाह ने ओमप्रकाश राजभर और अनुप्रिया पटेल से मिलकर इस मामले को निपटा दिया है। अब मायावती के लिए मुश्किलें बढ़नेवाली है। 

योगी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर पिछले कुछ समय से भाजपा से नाराज चल रहे थे और उन्‍होंने राज्‍यसभा चुनावों में बगावती तेवर अख्तियार कर लिए थे। इसलिए मौके की गंभीरता को देखते हुए अमित शाह ने राजभर से मुलाकात में देरी नहीं की। अपना दल ने पहले ही भाजपा को समर्थन का ऐलान कर रखा है। लेकिन फिर भी इस मौके को कमजोर नहीं हेने देने के लिए केंद्रीय मंत्री और अपना दल की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने संसद भवन में संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार के ऑफ़िस में मुलाक़ात की। अनुप्रिया पटेल ने योगी सरकार के मंत्रियों से अपने विधायकों की शिकायत बारे में अमित शाह को अवगत कराया। अमित शाह ने भरोसा दिया उनके विधायकों की शिकायतों को दूर किया जायेगा। इस प्रकार भाजपा ने अपने 324 वोटों को अपने पाले में रखने की पूरी व्‍यवस्‍था कर ली है।

10 अप्रैल को अमित शाह अपने यूपी दौरे के समय वो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्या और दिनेश शर्मा, यूपी भाजपा अध्यक्ष महेन्द्रनाथ पांडेय और संगठन मंत्री सुनील बंसल और यूपी के एनडीए की सहयोगियों के साथ बैठक करेंगे। इसमें मतभेद तथा शिकायत दूर करने का प्रयास होगा।

वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और बिहार भाजपा महासचिव और बिहार भाजपा के इंचार्ज भूपेन्द्र यादव ने रामविलास पासवान से मुलाकात कर नाराजगी को दूर किया और भरोसा दिया एनडीए की बैठक पहले से ज्यादा होगी और सभी साथी दलों की बातों को सुना जायेगा और उनकी समस्याओं का हल करने में जो भी मदद भाजपा और सरकार के स्तर पर हो सकती होगी वो की जायेगी।

सपा-बसपा की परेशानी बढ़ी

राज्‍य की 31 राज्‍यसभा सीटों में से 10 पर चुनाव होने हैं। इनमें से यूपी में आठ भाजपा और एक सपा के खाते में जानी तय है। 10वीं सीट के लिए बसपा ने सपा से तालमेल कर अपने उम्‍मीदवार को उतारा है। राज्‍यसभा की एक सीट में जीत हासिल करने के लिए 37 वोट की दरकार है। बसपा के 19 और सपा के 47 विधायक हैं। सपा के एक प्रत्‍याशी के जीतने के बाद उसके पास 10 वोट अतिरिक्‍त होंगे। इसके अलावा कांग्रेस के सात और रालोद के एक वोट का भी समर्थन बसपा को मिलेगा। इस प्रकार बसपा के किसी तरह 37 वोट हो रहे हैं लेकिन यहीं पर सपा नेता शिवपाल यादव और नरेश अग्रवाल की भूमिका अहम हो जाती है।

इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि भाजपा के आठ प्रत्‍याशी जीतने के बाद उसके पास 28 वोट अतिरिक्‍त होंगे। इसलिए अपने नौवें प्रत्‍याशी को जिताने के लिए उसको महज नौ वोटों की दरकार है। इसलिए सपा और बसपा के ऐसे विधायकों पर भी भाजपा की नजर है जो अगले चुनाव में उसके टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्‍छा रखते हैं। भाजपा को इस कड़ी में तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिल चुका है। इसके अलावा निषाद पार्टी के एकमात्र विधायक का भी उसको समर्थन मिल चुका है। यह इसलिए दिलचस्‍प है क्‍योंकि निषाद पार्टी के संस्‍थापक के पुत्र प्रवीण निषाद गोरखपुर से सपा के टिकट पर लोकसभा उपचुनाव में जीते हैं।

सपा से राज्‍यसभा टिकट नहीं मिलने से नाराज नरेश अग्रवाल ने भाजपा का दामन थाम लिया है। सूत्रों के मुताबिक इसकी राजनीतिक कीमत के रूप में उन्‍होंने भाजपा को आश्‍वस्‍त किया है कि उनका बेटा और हरदोई से सपा विधायक नितिन अग्रवाल भाजपा के पक्ष में वोट करेगा। यदि ऐसा कोई एक वोट भी कम हो जाता है तो बसपा का उम्‍मीदवार राज्‍यसभा नहीं पहुंच पाएगा। वहीं सपा में शिवपाल यादव गुट हाशिए पर है। सपा नेतृत्‍व के साथ उनके रिश्‍तों में खटास जगजाहिर है। इसके अलावा बसपा के साथ शिवपाल के रिश्‍ते 1995 के गेस्‍टहाउस कांड के बाद कटु रहे हैं। ऐसे में उनके गुट की भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Naresh Agrawal, Bjp Leader

आखिरी वक्त में अमित शाह ने चली चाल
सपा ने पहले ही साफ किया है कि वह अपने 10 विधायकों का वोट बसपा को देगी, जबकि अजीत सिंह की पार्टी ने अपने एक विधायक का समर्थन बसपा को देने का ऐलान किया है। वहीं कांग्रेस अपने 7 विधायकों का समर्थन भी बसपा को देने को तैयार है। लिहाजा इस गणित से मायावती के उम्मीदवार आसानी से राज्यसभा पहुंच सकता है। लेकिन मायावती के गणित को खराब करने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने नई रणनीति अपनाई और आखिरी समय पर अपनी पार्टी की ओर से 9वें उम्मीदवार का नामांकन भरवाया। ऐसे में साफ है कि मायावती के उम्मीदवार के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है।

मायावती के उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर और भाजपा के नौंवे उम्मीदवार अनिल अग्रवाल के बीच राज्यसभा को लेकर टक्कर होगी। माना जा रहा है कि मायावती के गणित को बिगाड़ने के लिए अमित शाह ने नरेश अग्रवाल को पार्टी में शामिल किया है, जोकि कांग्रेस, बसपा और सपा तीनों ही पार्टी में रह चुके हैं। नरेश अग्रवाल के बेटे खुद विधायक हैं, लिहाजा वह भाजपा उम्मीदवार को अपना वोट दे सकते हैं, इसका मतलब साफ है कि मायावती के खाते से सपा का एक वोट कट जाएगा।

क्योंकि अखिलेश यादव की पार्टी के विधायकों को लेकर संशय बरकरार है। कई ऐसे सपा विधायक हैं जोकि शिवपाल समर्थक हैं और वह पार्टी के खिलाफ वोट कर सकते हैं। इससे पहले भी राष्ट्रपति के चुनाव में सपा के कुछ विधायकों ने भाजपा उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को अपना वोट दिया था।