एफआईआर निरस्त करने के लिए अस्थाना ने उच्च न्यायालय का रुख किया

Written by Newsroom Staff October 23, 2018 4:14 pm

नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने मंगलवार को खुद पर लगे रिश्वत के आरोप मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत और एफआईआर को निरस्त करने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय की शरण ली। इससे पहले सुबह, सीबीआई के गिरफ्तार उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) देवेंद्र कुमार ने खुद की गिरफ्तारी को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। एफआईआर निरस्त करने को लेकर अदालत की ओर से निर्देश देने की मांग करने वाली अस्थाना और कुमार की याचिकाओं पर उच्च न्यायालय मंगलवार को ही सुनवाई करेगा। कुमार ने अपनी याचिका में अदालत से मामले के संबंध में दस्तावेज मंगवाने का आग्रह किया है।

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उन्होंने उच्च न्यायालय से कहा कि मामले की जांच में उनका जबरदस्त रिकॉर्ड होने के बावजूद उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें फर्जी, तुच्छ और बाद में सोच समझकर मामले में फंसाया गया है। उन्होंने खुद के विरुद्ध एफआईआर को मामले में अचंभित करने वाली स्थिति बताया और खुद के विरुद्ध शिकायत को अवैध और दुर्भावनापूर्ण बताया।

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सीबीआई ने सोमवार को कुमार को अस्थाना के विरुद्ध घूस मामले में दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने के लिए गिरफ्तार किया था। सीबीआई के अनुसार, धनशोधन और भ्रष्टाचार के कई मामलों का सामना कर रहे मांस व्यापारी मोइन कुरैशी ने खुद पर चल रहे मामले को निपटाने के लिए उन्हें घूस दी थी।

सीबीआई के अनुसार, कुमार ने कुरैशी मामले में एक गवाह सतीश साना के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया था, जिसमें यह दिखाया गया था कि उसने बयान दिल्ली में 26 सितंबर 2018 को दर्ज कराया था। हालांकि जांच से यह खुलासा हुआ कि साना दिल्ली में उस दिन था ही नहीं। उस दिन वह हैदराबाद में था और 1 अक्टृूबर 2018 को वह जांच में शामिल हुआ था।

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एजेंसी ने अस्थाना और कई अन्य के खिलाफ कथित रूप से मांस निर्यातक मोइन कुरैशी से घूस लेने के आरोप में रविवार को एफआईआर दर्ज की थी। इसके एक दिन बाद डीएसपी देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि दिसंबर 2017 और अक्टूबर 2018 के बीच कम से कम पांच बार रिश्वत दी गई।

गुजरात कैडर के भारतीय पुलिस सेवा के 1984 बैच के अधिकारी अस्थाना पर एक व्यापारी से दो करोड़ रुपये घूस लेने का आरोप है, जो कुरैशी मामले में जांच को ‘नुकसान’ पहुंचाने के तहत जांच के घेरे में है। इस मामले की जांच अस्थाना की अगुवाई में गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) कर रही थी।