असम NRC मामले को लेकर राम माधव ने ये क्या कह दिया, सुनकर दंग रह जाएंगे…

Avatar Written by: September 1, 2018 11:59 am

नई दिल्ली। असम के एनआरसी का मुद्दा अभी भी गरम है। 40 लाख लोगों के वहां अवैध रूप से रहने का इसमें दावा किया जा रहा है। यह आंकड़े एनआरसी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जारी किए हैं। लेकिन सरकार की मानें तो जिनके नाम इसमें शामिल नहीं है उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है वह इस मामले को लेकर चिंतित होने के बजाए अपने दस्तावेज के साथ अपनी दावेदारी सिद्ध कर सकते हैं। सरकार की मानें तो अभी कई चरणों से इस प्रक्रिया को गुजरना है। ऐसे में किसी के लिए चिंता की कोई वजह नहीं है।NRC

वहीं भाजपा के महासचिव राम माधव ने असम के एनआरसी पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं होगा और संबंधित लोगों को अपनी नागरिकता सिद्ध करने के पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे। उन्होंने दावा कि किसी भी सांप्रदायिक समूह को परेशान करने, किसी के खिलाफ किसी भी विरोधाभास के साथ यह प्रयास नहीं किए जा रहे।Ram Madhav, BJP उन्होंने कहा कि असम और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में हम कड़े निर्णय लेने को तैयार हैं, लेकिन किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा। माधव ने कहा कि पीड़ित लोगों के पास ट्रिब्यूनल और उच्च न्यायालय जाने का विकल्प भी मौजूद है।Ram Madhav, BJP

असम में अवैध रूप से रह रहे 40 लाख लोग

असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) में कुल 3.29 करोड़ लोगों में से 2.89 करोड़ लोग योग्‍य पाए गए हैं। इनके अलावा 40 लाख लोगों के वहां अवैध रूप से रहने का दावा किया जा रहा है। यह आंकड़े एनआरसी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जारी किए हैं। एनआरसी का कहना है कि यह सिर्फ मसौदा है, अंतिम सूची नहीं है। एनआरसी के रजिस्‍ट्रार जनरल शैलेश ने जानकारी दी है कि जिन लोगों का नाम पहले मसौदे में था और अंतिम मसौदे से गायब है, उन्‍हें एनआरसी की ओर से व्‍यक्तिगत पत्र भेजा जाएगा। इसके जरिये वह अपना दावा पेश कर सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा बड़ी मनाव समस्या

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह असम में हाल ही में प्रकाशित राष्ट्रीय नागरिक पंजी के मसौदे में शामिल किए गए व्यक्तियों में से दस फीसदी के पुन:सत्यापन पर विचार कर सकता है। शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे को ‘‘बड़ी मानव समस्या’’ करार दिया था।