मक्का के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा श्रद्धालु आते हैं सबरीमाला मंदिर, नहीं जानते होंगे ये कारण

Written by: October 17, 2018 4:20 pm

नई दिल्ली। सबरीमाला मंदिर की वेबसाइट के मुताबिक, इस मंदिर में सभी धर्मों और जातियों के लोगों को अंदर आकर पूजा करने की अनुमति है, हालांकि मंदिर में लंबे वक्त तक 10 से 50 साल तक की औरतों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहा है जो अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हट गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि महिलाओं के प्रवेश पर रोक महिलाओं के समानता के अधिकार का हनन है।सबरीमाला किसी खास वक्त के लिए खुलने वाले दुनिया के सबसे बड़े तीर्थों में से एक है, इसमें सऊदी अरब के मक्का के बाद सबसे ज्यादा श्रृद्धालु आते हैं। पिछले साल इस मंदिर में 3.5 करोड़ लोग दर्शन के लिए आए थे। भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 2016-17 के उत्सव के दौरान मंदिर में 243.69 करोड़ रुपये का दान आया था।

माना जाता है कि हिंदू भगवान अयप्पा ने सबरीमाला को खतरनाक राक्षसी महिषी को मारने के बाद ध्यान करने के लिए चुना था, वहीं दूसरी मान्यता के अनुसार परशुराम महर्षि ने केरल को अपनी कुल्हाड़ी फेंककर के समुद्र से उठाया था और उन्होंने ही सबरीमाला में भगवान अयप्पा की स्थापना की थी।

इन खास दिनों में ही खुलता है मंदिर

जानकारी के लिए बता दें कि ये मंदिर पूरे साल नहीं खुलता है,बल्कि मलयालम कैलेंडर के हिसाब से हर महीने में 5 दिनों के लिए खुलता है। इसके अलावा यह नवंबर महीने के बीच से जनवरी के बीच तक मंडलम और मकाराविलक्कु सालाना उत्सवों के लिए खुलता है। भगवान अयप्पा के वक्त मकर संक्रांति के दिन को बेहद खास मानते हैं। मकर संक्रांति के दिन मंदिर में दर्शन के लिए सबसे ज्यादा श्रद्धालु पहुंचते हैं।sabrimala temple

सबरीमाला आने वाले भक्त सिर पर पोटली रखे रहते हैं। इस पोटली में नैवेद्य होता है. जिसे प्रसाद के तौर पर भी दिया जाता है. मंदिर की मान्यता के अनुसार तुलसी या रुद्राक्ष की माला पहनकर, व्रत रखकर और सिर पर नैवेद्य लेकर जो व्यक्ति भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए आएगा, उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

18 पवित्र सीढ़ियां

केरल का सबरीमाला मंदिर दक्षिण भारत के सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है, इस मंदिर तक जाने के लिए 18 पवित्र सीढ़ियों को चढ़ना होता है. इन सीढ़ियों के अलग-अलग अर्थ भी बताए गए हैं। पहली 5 सीढ़ियां इंसान की 5 इंद्रियों की प्रतीक हैं, इसके बाद की 8 सीढ़ियां मानवीय भावनाओं की प्रतीक हैं। अगली 3 सीढ़ियों को मानवीय गुण और आखिरी 2 सीढ़ियों को ज्ञान और अज्ञान का प्रतीक माना जाता है।

पीरियड्स से नहीं है संबंध

एमए देवैया के मुताबिक, मैं पिछले 25 सालों से सबरीमाला मंदिर जा रहा हूं। लोग मुझसे अक्सर पूछते हैं कि इस मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध किसने लगाया है, मैं छोटा सा जवाब देता हूं, “खुद अयप्पा (मंदिर में स्थापित देवता) ने। (पुरानी कथाओं) के अनुसार, अयप्पा अविवाहित हैं, वे अपने भक्तों की प्रार्थनाओं पर पूरा ध्यान देना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने तब तक अविवाहित रहने का फैसला किया है जब तक उनके पास कन्नी स्वामी (यानी वे भक्त जो पहली बार सबरीमाला आते हैं) आना बंद नहीं कर देते.” और महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर रोक की बात का पीरियड्स से कुछ भी लेना-देना नहीं है।

विष्णु और शिव के संगम से हुआ है अयप्पा का जन्म

देवैया लिखते हैं कि पुराणों के अनुसार अयप्पा विष्णु और शिव के पुत्र हैं, ये किस्सा उनके अंदर की शक्तियों के मिलन को दिखाता है ना कि दोनों के शारीरिक मिलन को। इसके अनुसार देवता अयप्पा में दोनों ही देवताओं का अंश है. जिसकी वजह से भक्तों के बीच उनका महत्व और बढ़ जाता है।

परंपरावादी कहते हैं कि अगर इस पूर्व कहानी पर लोगों का विश्वास नहीं, तो फिर मंदिर में श्रृद्धा के साथ दर्शन कर क्या फायदा होगा? इसीलिए वे कह रहे हैं कि जज के फैसले से इसपर क्या फर्क पड़ेगा क्योंकि पूर्व कहानी में श्रृद्धा के बिना उन्हें दर्शन से पुण्य नहीं मिलेगा।