एमबीसीएन के दिव्यांग बच्चों ने मनाया ‘अंतर्राष्ट्रीय वीक ऑफ द डेफ 2017’

Written by: September 20, 2017 5:54 pm

नोएडा। माता भगवन्ती चड्ढा निकेतन, द पॉन्टी चड्ढा फाउंडेशन की एक पहल और दिव्यांग बच्चों के लिए एक धर्मार्थ विद्यालय, जिसने इस साल अद्वितीय जागरूकता ड्राइव के साथ ‘अंतर्राष्ट्रीय वीक ऑफ द डेफ 2017’ मनाया। यह अभियान 18 सितंबर को शुरू हुआ और 22 सितंबर तक जारी रहेगा। इस अवसर पर दिव्यांग बच्चों ने पुलिस स्टेशन, फायर स्टेशन, अस्पतालए मॉल, बैंक, सब्जी बाजार, दुकानों, कॉर्पोरेट कार्यालय और स्कूल जैसे स्थानों का दौरा किया और लोगों को बोलने तथा सुनने संबंधी विकलांग लोगों के साथ संचार करने के कुछ साधारण संकेत सिखाए।

लोगों ने इन बच्चों का उत्साहवर्द्धन करने के साथ हीं उनका स्वागत भी किया और पूरी तरह से उनके कारण का समर्थन करते हुए 10 मिनट की इंटरैक्टिव साइन लैंग्वेज पाठ में भाग लिया। इस अभियान के पीछे मुख्य एजेंडा इन बच्चों के लिए सुलभ माहौल का निर्माण करना था। इसके अलावा इस कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों के लिए उनके अंदर समझदारी और सहानुभूति को विकसित करना है।

सांकेतिक भाषा को 3 श्रेणियों में विभाजित किया गया है। अभिवादन, ज़रूरत और आपातकाल। ये बुनियादी संकेत लोगों को बोलने तथा सुनने संबंधी विकलांग लोगों के साथ आसानी से कनेक्ट और संवाद करने में सहायता करते हैं। इस अवसर पर स्कूल ने इन तीन श्रेणियों के छोटी वीडियो श्रृंखला भी जारी की। ये वीडियो सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी किए गए ताकि साइन लैंग्वेज के बारे में बड़ी संख्या में लोगों को परिचित किया जा सके।

हाल ही में विद्यालय ने एक वीडियो भी शुरू किया जिसमे माता भगवन्ती चड्ढा निकेतन के दिव्यांग बच्चों ने साइन भाषा में राष्ट्रीय गान का निर्माण किया जबकि जेनेसिस ग्लोबल स्कूल के छात्रों ने गायन और वादों की भूमिका निभाई। यह वीडियो हर फिल्म से पहले देश के सभी वेब सिनेमा में दिखाया जायेगा।

इस पहल के बारे में बात करते हुए माता भगवन्ती चड्ढा निकेतन के निदेशक डॉ वंदना शर्मा ने कहा कि ‘अंतरराष्ट्रीय डेफ सप्ताह’ के दौरान सप्ताह भर आयोजित कार्यक्रम के द्वारा हमें बोलने तथा सुनने संबंधी समस्याओं के बारे में जागरूकता फैलाने का मौका मिलता है। हमें इस विकलांगता से संबंधित मिथकों को नकारने की दिशा में काम करना चाहिए। हम एमबीसीएन में लोगों को दिव्यांग लोगों की विशेष जरूरतों के बारे में शिक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें स्वतंत्र जीवन के लिए सक्षम बना रहे हैं।

गुरदीप पोंटी सिंह चड्ढा द्वारा स्थापितए एमबीसीएन दिव्यांग बच्चों के लिए एक स्कूल है। समुदाय के भीतर रहने के लिए दिव्यांग बच्चों को शिक्षित और तैयार करने के लिएए स्कूल को 1999 में स्थापित किया गया था ताकि इन बच्चों को आत्मनिर्भर, शारीरिक सामाजिक और आर्थिक रूप से विकसित बनाया जा सके।