सुप्रीम कोर्ट का आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला

Avatar Written by: August 30, 2018 7:22 pm

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि एक राज्य के अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के सदस्य दूसरे राज्यों में सरकारी नौकरी में आरक्षण के लाभ का दावा नहीं कर सकते यदि उनकी जाति वहां एसटी और एससी के रूप में अधिसूचित नहीं है।सुप्रीम कोर्ट Supreme Court

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति के फैसले में कहा कि किसी एक राज्य में अनुसूचित जाति के किसी सदस्य को दूसरे राज्यों में भी अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता जहां वह रोजगार या शिक्षा के इरादे से गया है। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति एम शांतानागौडर और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं।Maratha Reservation

संविधान पीठ ने कहा, ‘एक राज्य में अनुसूचित जाति के रूप में अधिसूचित व्यक्ति एक राज्य में अनुसूचित जाति के रूप में अधिसूचित होने के आधार पर दूसरे राज्य में इसी दर्जे का दावा नहीं कर सकता।’ न्यायमूर्ति भानुमति ने हालांकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एससी-एसटी के बारे में केन्द्रीय आरक्षण नीति लागू होने के संबंध में बहुमत के दृष्टिकोण से असहमति व्यक्त की।

supreme court

पीठ ने 4:1 के बहुमत के फैसले में कहा कि जहां तक दिल्ली का संबंध है तो एससी-एसटी के बारे में केन्द्रीय आरक्षण नीति यहां लागू होगी। संविधान पीठ ने यह व्यवस्था उन याचिकाओं पर दी जिनमें यह सवाल उठाया गया था कि क्या एक राज्य में एससी-एसटी के रूप में अधिसूचित व्यक्ति दूसरे राज्य में आरक्षण प्राप्त कर सकता है जहां उसकी जाति को एससी-एसटी के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है।supreme court of india

पीठ ने इस सवाल पर भी विचार किया कि क्या दूसरे राज्य के एससी-एसटी सदस्य दिल्ली में नौकरी के लिये आरक्षण का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

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