जानिए कैसे अपने ग्रह दोष ओर समस्याओं से पाएं मुक्ति, केसर के उपयोग से

जिस प्रकार बृहस्पति ग्रह का रत्न पुखराज है उसी प्रकार केसर का प्रतिनिधि ग्रह बृहस्पति है। बृहस्पति जो ग्रहों में सबसे महान् हैं अपनी स्थिति से आकाश में उच्च स्तर पर है। बृहस्पति का मार्गी होना, वक्री होना, उच्च राशि अथवा नीच राशिगत होना यह सब जीवन पर प्रभाव डालते हैं। अगर बृहस्पति मार्गी हो तो बुद्धि सुचारू रूप से सही दिशा मिलती है। किंतु वक्री होने पर मन-मस्तिष्क में भ्रम और विवाद पैदा करते हैं। बृहस्पति ग्रह ज्ञान, विद्या का ग्रह है। अध्ययन में रुचि बढ़ाने के लिए बृहस्पति का बलवान होना जरूरी है। बृहस्पति या गुरु शरीर में चर्बी, लीवर, दिमाग से संबंधित रोगों का कारक होता है। धर्म के अधिष्ठाता बृहस्पति को मांगलिक कार्यों का कारक ग्रह माना गया है। घर से किसी मांगलिक कार्य के लिए निकलें तो इसका तिलक कर सकते हैं। विवाह में रुकावट के लिए बृहस्पति का कमजोर होना माना गया है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ज्ञान, विद्या और सौभाग्य देनेवाला ग्रह है बृहस्पति। साथ ही अच्छी सेहत के लिए भी बृहस्पति का अच्छा होना जरूरी माना जाता हें। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि यदि व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति अनुकूल स्थिति में न हो तो उसे जीवनभर मान-सम्मान और संपत्ति के अभाव का सामना करना पड़ता है। ज्योतिषशास्त्र में जहां ग्रहों की अनुकूलता और प्रतिकूलता के प्रभावों के बारे में बताया गया है, वहीं प्रतिकूल ग्रहों को अनुकूल करने के तरीके भी बताए गए हैं। बृहस्पति को अनुकूल करने के लिए आमतौर पर पुखराज पहनने की सलाह दी जाती है लेकिन अगर आप इसे नहीं पहनना चाहते हैं तो केसर आपके लिए कहीं ज्यादा उपयोगी साबित हो सकती है।

जानिए की कैसे केसर की सहायता से आप देवगुरु बृहस्पति को अनुकूल बनाकर भाग्य को संवार सकते हैं…

क्या है केसर का महत्व?

केसर को न केवल पूजा-पाठ में उपयोग किया जाता है बल्कि रसोई के लिए यह एक उपयोगी मसाला भी है। ज्योतिषशास्त्र में इसे गुरु से संबंधित वस्तु माना गया है जो गुरु के रत्न पुखराज की तरह ही गुरु के शुभ प्रभाव को बढ़ाने का काम करता है।

पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार देव गुरु बृहस्पति के प्रिय वार बृहस्पतिवार को धन, पुत्र, मनचाहा जीवनसाथी और विद्या को पाने का दिन माना जाता है। इन्हें प्रसन्न करने के लिए लोग व्रत, उपाय, दान और खास पूजन करते हैं। इस दिन एक खास जड़ी-बूटी जिसका नाम है केसर, उसके प्रयोग से बहुत सारे लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

जानिए कैसे किया जाता है केसर का उपयोग?

केसर का उपयोग पाउडर और रेशे (थ्रेड) के रूप में किया जाता है। इसे पानी में भिगोने पर यह सुंगध और रंग देती है। भारत में कश्मीर में सबसे ज्यादा केसर की खेती होती है। इसके अतिरिक्त स्पेन और ईरान में केसर की बड़े स्तर पर पैदावार होती है।

बृहस्पति की स्थिति के प्रभाव–

नवग्रहों में गुरू के रूप में मान्य बृहस्पति को शुभ ग्रह माना गया है। जन्म कुण्डली में इनकी स्थिति और गोचर से जीवन में विभिन्न तरह की स्थितियां आती रहती हैं। गुरु से प्रभाव से शिक्षा, धन, पारिवारिक जीवन और कई चीजें प्रभावित होती हैं इसलिए गुरु को शुभ बनाए रखना जरूरी माना गया है। इस कार्य में केसर बहुत ही कारगर होता है।

केसर के उपयोग से होगा मंगल-मंगल—

जीवन में सभी मंगल कार्य होते रहे इसके लिए बृहस्पति का उच्च स्थिति में होना बेहद जरूरी है। क्योंकि बृहस्पति अथवा गुरु ग्रह को मांगलिक कार्यों का कारक माना जाता है। पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि गुरु को अनुकूल करने के लिए केसर का तिलक रोज लगाना चाहिए। केसर का एक रेशा लेकर एक कटोरी में रखें और उसके ऊपर एक-दो बूंद पानी डालें, ये अपना रंग छोड़ने लगेगी, फिर सीधे हाथ की रिंग फिंगर से तिलक लगाएं।

सुधारे अपनी आर्थिक स्थिति केसर के उपयोग से–

अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए आप गुरुवार को नहाते समय पानी में एक चुटकी हल्दी डाल लें और फिर इस पानी से स्नान करें। नहाने के बाद केले के पेड़ के पास देसी घी का दीपक जलाएं, गुड़ और चना अर्पित करें। केसर का टीका लगाएं। साथ ही ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करते रहें। आपका आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। यह क्रिया शुक्ल पक्ष के गुरुवार से शुरू करें।

दांपत्य जीवन में खुशियों के लिए केसर का ऐसे करें प्रयोग—

अगर आपके दांपत्य जीवन में किसी तरह का तनाव रहता है या कलहपूर्ण स्थितियों का सामना करना पड़ रहा हो तो अपने माथे, दिल और नाभि पर केसर का तिलक लगाएं और केसर मिश्रित दूध से शिवलिंग का अभिषेक करें। ऐसा लगातार करने पर 2 से 3 महीने के अंदर प्रभाव दिखना शुरू हो जाता है, ऐसी मान्यता है। लक्ष्मी पूजन से पहले मीठे दही में केसर मिला कर खाने से आश्चर्यजनक लाभ प्राप्त होते हैं।

कुंडली में बृहस्पति अशुभ चल रहा हो तो हर रोज़ नियम से केसर का तिलक मस्तक के सैंटर में, ह्रदय के मध्य और नाभि पर लगाएं।

दूध में केसर मिलाकर पीने से स्मरण शक्ति और पौरुष शक्ति में वृद्धि होती है।

चने की दाल और केसर श्री हरी विष्णु के मंदिर अथवा केले के पेड़ पर बृहस्पतिवार को रख आएं।

ध्यान रहे पीछे मुड़कर नहीं देखें। इस उपाय से अभाग्य का नाश होता है।

केसर का इस्तेमाल हम किसी और तरह से कर सकते हैं। केसर का इस्तेमाल, केसर दूध, केसर वाले चावल, ठंडई से लेकर मसाले तक में केसर का विभिन्न रूपों में प्रयोग किया जाता है। केसर वाली खिरनी, गुरुवार को खुद खायें और किसी गुरु को खिलाएं तो बृहस्पति सकारात्मक फल देता है। इसकी थोड़ी सी मात्रा किसी भी दिश को खुशबूदार बना देती है। ध्यान रहे ज्यादा मात्रा में लेने पर दिमाग, भारी हो जाता है और नींद आने लगती है। केसर का उपयोग धार्मिक कार्यों में भी किया जाता है। बृहस्पतिवार के दिन केसर का तिलक करें। केसर दूध या केसर वाली खिरनी, छोटे चावल वाली खीर, दान करें। यदि किसी गुरु को सेवन करने को दें तो इससे बृहस्पति सकारात्मक फल देता है। पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार वैवाहिक जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए बृहस्पति का अच्छा होना बहुत जरूरी है। ज्योतिष विद्या विश्वास नहीं विज्ञान है। सत्य को परखने के लिए हम प्रयोग करके देख सकते हैं।

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