जानिए कौन थीं पाकिस्तान की आइकन अस्मां जहांगीर

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पाकिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता अस्मां जहांगीर के निधन के बाद ट्विटर पर ट्विटर पर #AsmaJahangir ट्रेंड करने लगा। वह एक असाधारण महिला थीं, जो साधारण लोगों के लिए लड़ती रहीं। 1995 में मानवाधिकारों के लिए काम करने पर उन्हें मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। मानवाधिकार आयोग की पूर्व प्रमुख आसमा जहांगीर पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की अध्यक्ष चुनी जाने वालीं पहली महिला वकील थीं।
रविवार को मानवाधिकार वकील और कार्यकर्ता रविवार को निधन हो गया, उन्होंने अपनी पूरी उम्र धार्मिक उग्रवाद के खिलाफ, महिलाओं के अधिकारों और दलित अल्पसंख्यकों के लिए लड़ते हुए गुजार दी।
 
कुछ ऐसी थीं अस्मां जहांगीर –
1982 में असमा जहांगीर ने जनरल जिया द्वारा लागू “इस्लामी कानून” के खिलाफ विरोध किया। जिसमें उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने भी समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि “इस्लामी कानून” इस आधुनिक युग में मान्य नहीं हैं और इसमें बदलाव की मांग की है।
12 फरवरी 1983 को असमा जहांगीर ने अपने साथी वकीलों के साथ “महिला अधिकारों” के इस्लामिक कानून के खिलाफ विरोध किया।
बाद में उन्होंने “न्यूयॉर्क टाइम्स” को एक पत्र लिखा जिसमें कहा कि पाकिस्तान में महिलाओं को बुरी तरह से ट्रीट किया जा रहा है और वे पूरी तरह से असहाय हैं। दुनिया को पाकिस्तान में महिलाओं की दयनीय परिस्थितियों के बारे में सूचित किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, असमा जहांगीर ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों में “पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के दुख” के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान में गैर मुस्लिम जबरदस्ती इस्लाम में परिवर्तित किए जा रहे हैं।
उन्होंने 2005 में महिला और पुरुषों के लिए मिक्स मैराथन का आयोजन किया और बोली- इससे लोगों की सोच में परिवर्तन आएगा।
मुंबई अटैक और समझौता एक्सप्रेस मुद्दे पर उन्होंने भारत का साथ दिया और कहा इन धमाकों के लिए आइएसआइ को जिम्मेदार ठहराया था।
वह इस्लाम, पाकिस्तान की विचारधारा और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ बोलने के लिए प्रसिद्ध थीं।