स्वास्थ्य सुधार और निगरानी के लिए ‘स्मार्ट टॉयलेट’ -अध्ययन

नेचर डिजिटल मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन और मोरग्रीज इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च के शोधकर्ता दवा को अमल में लाने के लिए यूरिन (मूत्र) में पाए जाने वाले मेटाबोलिक हेल्थ इन्फॉर्मेशन पर काम कर रहे हैं।

Written by: November 15, 2019 10:01 am

नई दिल्ली। वेरिएबल, स्मार्ट टेक्नोलॉजी स्वास्थ्य सुधार और निगरानी की क्षमता बदल रहे हैं, लेकिन एक निश्चित रूप से कम तकनीक वाली वस्तु ‘हम्बल टॉयलेट’ उन सभी को बेहतर बनाने की क्षमता हो सकती है। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है। रिसर्च ग्रुप कून एक ऐसा टॉयलेट डिजाइन कर रहा है, जिसमें एक पोर्टेबल मास स्पेक्ट्रोमीटर शामिल होगा। यह विभिन्न विषयों पर इंडिविजुअल और प्रोसेस सैंपल्स को पहचान सकेगा।

smart toilet
कून का यह भी मानना है कि ‘स्मार्ट टॉयलेट’ कॉनसेप्ट के प्रमुख जनसंख्या स्वास्थ्य प्रभावी भी हो सकते हैं। नेचर डिजिटल मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन और मोरग्रीज इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च के शोधकर्ता दवा को अमल में लाने के लिए यूरिन (मूत्र) में पाए जाने वाले मेटाबोलिक हेल्थ इन्फॉर्मेशन पर काम कर रहे हैं।

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अध्ययन के प्रमुख जोशुआ कून ने कहा, “हमे पूरा यकीन है कि हम एक ऐसी टॉयलेट को डिजाइन कर सकते हैं, जो यूरिन का सैंपल ले सकती हैं। मुझे लगता है कि असली चुनौती यह है कि हम इस इंस्ट्रूमेंट को सरल, सस्ता और पर्याप्त बनाने के लिए इंजीनियरिंग में निवेश करने जा रहे हैं। और इसके लिए या तो बहुत दूर तक जाना होगा या बिल्कुल नहीं हो सकेगा।”

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यूरिन में एक व्यक्ति की पोषण संबंधी आदतों, जैसे व्यायाम, दवा के उपयोग, नींद के पैटर्न और अन्य जीवनशैली विकल्पों का एक आभासी तरल इतिहास होता है। यूरिन में 600 से अधिक मेटाबॉलिक लिंक भी शामिल हैं, जिनमें कुछ प्रमुख जानलेवा बीमारी जैसे कैंसर, मधुमेह और किडनी रोग शामिल हैं।