स्वच्छ भारत कार्यक्रम : पूरा कर रहा स्वच्छता का गांधी का सपना

कार्यक्रम में देशभर में गांवों में हर घर में शौचालय उपलब्ध कराने की योजना भी शामिल थी। स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य देश के 4,041 शहरों में पैदा होने वाले ठोस कचरे का 100 फीसदी वैज्ञानिक प्रबंधन करना भी है।

Written by: October 2, 2019 11:30 am

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब 15 अगस्त, 2014 को स्वच्छ भारत कार्यक्रम की घोषणा की थी, तो वह महात्मा गांधी के सपने को पूरा करने की दिशा में प्रमुख पहल थी। प्रधानमंत्री के तौर पर स्वतंत्रता दिवस पर लाल किला से अपने पहले भाषण में मोदी ने कहा था कि कैसे महात्मा गांधी ने स्वच्छता पर बहुत जोर दिया था और उनकी इच्छा थी कि देशवासी इसे आगे बढ़ाएं। राष्ट्रपिता के उपदेशों को प्रेरणा के तौर पर लेते हुए मोदी सरकार ने दो अक्टूबर, 2019 को गांधी जी की 150वीं जयंती तक देश को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) करने के उद्देश्य से दो अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी) लॉन्च की थी।

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कार्यक्रम में देशभर में गांवों में हर घर में शौचालय उपलब्ध कराने की योजना भी शामिल थी। स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य देश के 4,041 शहरों में पैदा होने वाले ठोस कचरे का 100 फीसदी वैज्ञानिक प्रबंधन करना भी है। पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के अनुसार, एसबीएम-जी के अंतर्गत पांच फरवरी, 2019 तक देशभर में नौ करोड़ शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता कवरेज 98 फीसदी तक हो चुका है, जो दो अक्टूबर, 2014 को सिर्फ 38.7 प्रतिशत था। मंत्रालय ने कहा कि 27 राज्य, 601 जिले, 5,934 ब्लॉक, 2,46,116 ग्राम पंचायतें और 5,50,151 गांव खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं।

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ओडीएफ घोषित होने वाले राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दादरा एवं नगर हवेली, दमन एवं दीव, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, लक्ष्यद्वीप, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु और उत्तराखंड शामिल हैं। मिशन के अन्य हिस्सों में हाथ से मैला उठाने की प्रथा बंद कराना, शहरों व कस्बों के ठोस कचरे का आधुनिक तथा वैज्ञानिक प्रबंधन, स्वास्थ्यकर स्वच्छता विधि अपनाकर व्यवहारिक बदलाव लाना, स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाना और उसे जन स्वास्थ्य से जोड़ना, शहरी स्थानीय निकायों की क्षमता बढ़ाना और कैपेक्स (पूंजीगत व्यय) और ओपेक्स (क्रियान्वयन और प्रबंधन) में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए माहौल तैयार करना शामिल हैं।

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मिशन में इस साल दो अक्टूबर की समय सीमा वाले लक्ष्यों में 66.42 लाख घरेलू शौचालयों (आईएचएचएल), 2.52 लाख सामुदायिक शौचालयों (सीटी), 2.56 लाख सार्वजनिक शौचालयों (पीटी) का निर्माण और घर-घर जाकर शहरी ठोस कचरे (एमएसडब्ल्यू) को जमा करना और उसका वैज्ञानिक प्रबंधन करना भी शामिल है। स्वच्छ भारत अभियान चलाने के लिए मोदी को पिछले सप्ताह अमेरिका में गेट्स फाउंडेशन ने प्रतिष्ठित ‘ग्लोबल गोलकीपर अवार्ड’ प्रदान किया। पुरस्कार लेने के दौरान उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर उन्हें यह सम्मान देना विशेषकर उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने में 1.3 अरब लोगों की दृढ़ इच्छाशक्ति को दिखाता है।

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मोदी ने कहा कि उन्होंने जब 2014 में स्वच्छ भारत मिशन की बात की थी, तो अलग-अलग प्रतिक्रियाएं मिली थीं। उस समय देश में 40 फीसदी से कम घरों में शौचालय थे, और अब यह आंकड़ा 100 फीसदी से बहुत नजदीक हो गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मोदी ने अमेरिका को बताया कि उनकी सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत कैसे हजारों जिंदगियां बचाईं हैं।