Lohri 2019: देशभर में मनाई जा रही है लोहड़ी, जानें क्या है इसका महत्व और कैसे करें पूजन

Written by Lakshmi Sharma January 13, 2019 10:43 am

नई दिल्ली। आज देशभर में लोहड़ी का त्‍योहार मनाया जा रहा है। लोहड़ी का ये खास पर्व मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। लोहड़ी के दिन को पौष माह का अंत और माघ के महीने की शुरुआत मानी जाती है। लोहड़ी का त्‍योहार एक-दूसरे से मिलने-मिलाने और खुशियां बांटने का त्‍योहार है।

दरअसल लोहड़ी शब्द तीन अक्षरों से मिलकर बना है ल से लकड़ी, ओह से गोहा यानि जलते हुए उपले व ड़ी से रेवड़ी। लोहड़ी को लाल लाही, लोहिता व खिचड़वार नाम से भी जाना जाता है। वहीं सिन्धी समाज भी इसे लाल लाही पर्व के रूप में मनाया जाता है।

लोहड़ी की लोह मतलब अग्नि दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के योगाग्नि-दहन की याद में जलाई जाती है। यज्ञ पर अपने जामाता महादेव का भाग न निकालने के दक्ष प्रजापति के प्रायश्चित्त के रूप में इस अवसर पर परिजन अपनी विवाहिता पुत्रियों के घर से वस्त्र, मिठाई, रेवड़ी, फल आदि भेजे जाते हैं।

आपको बताते चलें कि लोहड़ी को पहले कई स्‍थानों पर लोह कहकर भी बुलाया जाता था। लोह का अर्थ होता है लोहा। यहां लोहे को तवे से जोड़कर देखा जाता है। लोहड़ी के मौके पर पंजाब में नई फसल काटी जाती है। गेहूं के आटे से रोटियां बनाकर लोह यानी तवे पर सेकीं जाती हैं। इसलिए पहले इस त्योहार को लोह के नाम से भी जाना जाता था।

इतना ही नहीं लोहड़ी का त्योहार फसल की बुआई और उसकी कटाई से जुड़ा हुआ है। किसान अपने नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के रूप में लोहड़ी मनाते हैं। लोहड़ी की रात को साल की सबसे लंबी रात माना जाता है। लोहड़ी के दिन अग्नि व महादेवी के पूजन से दुर्भाग्य दूर होता है, पारिवारिक क्लेश समाप्त होता है तथा सौभाग्य प्राप्त होता है।

लोहड़ी पर विशेष पूजन-

– घर की पश्चिम दिशा में पश्चिममुखी होकर काले कपड़े पर महादेवी का चित्र स्थापित कर पूजन करें।

– सरसों के तेल का दीपक जलाएं, लोहबान से धूप करें, सिंदूर चढ़ाएं, बेलपत्र चढ़ाएं, रेवड़ियों का भोग लगाएं।

– सूखे नारियल के गोले में कपूर डालकर अग्नि प्रज्वलित कर रेवड़ियां, मूंगफली व मक्का अग्नि में डालें।

– इसके बाद सात बार अग्नि की परिक्रमा करें।

– लोहड़ी पूजा के साथ इस मंत्र का जाप करें: पूजन मंत्र: ॐ सती शाम्भवी शिवप्रिये स्वाहा॥

– लोहड़ी का पर्व मूलतः आद्यशक्ति, श्रीकृष्ण व अग्निदेव के पूजन का पर्व है।

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