मिशेल प्रत्यर्पण ‘न्यू इंडिया’ की बड़ी सफलता… क्या है राजकुमारी की वापसी और डोभाल कनेक्शन, देखिए पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली। संयुक्त अरब अमीरात से सिर्फ 2018 में ही ये तीसरा प्रत्यर्पण है, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड इसलिए भी है क्योंकि क्रिश्चियन मिशेल तीसरे देश से लाया गया है। कहने का मतलब ये है कि मिशेल ब्रिटिश सिटिजन है, जो कि करप्शन के आरोप में यूएई जेल में बंद था। हालांकि इससे पहले जो दो भारत लाए गए हैं, वो भारतीय नागिरक हैं। तो वहीं मिशेल ब्रिटिश नागरिक है। इसके बावजूद भारत ने ब्रिटिश सरकार को इस बारे में कोई सूचना नहीं दी। लिहाजा मिशेल का प्रत्यर्पण कहीं ना कहीं भारत की बढ़ती पावर को भी दर्शाता है। चूंकि मिशेल वीवीआईपी चॉपर डील जैसे हाईप्रोफाइल करप्शन केस में फंसा है। और इसमें सीधे तौर पर कांग्रेस का नाम सामने आ रहा है।Sushma Swaraj with india delegation in mangolia

भारतीय विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक, अब तक ब्रिटेन से मात्र एक ही भारतीय को प्रत्यर्पित कराया जा सका है। इसी साल समीरभाई वीनूभाई पटेल को हत्या, आपराधिक साज़िश समेत कई अन्य मामलों में भारत लाया गया था।

न्यू इंडिया का पावर

मिशेल को लाने के पीछे के कारण भले ही कई हों, पर कहीं ना कहीं ये ‘न्यू इंडिया’ के बढ़ते प्रभाव का असर इसलिए भी माना जा रहा है, क्योंकि 2014 में निजाम बदलने के बाद से मोदी सरकार की कूटनीति का असर कई मुद्दों पर देखने को मिल रहा है। कई मोर्चों पर भले ही मोदी सरकार फेल साबित हुई हो, पर भारत की विदेश नीति का लोहा आज दुनिया मान रही है। पीएम मोदी अपने संबोधन में अक्सर न्यू इंडिया की बढ़ती पावर का जिक्र करते रहते हैं।

कौन हैं शेखा लतीफा

भले ही मिशेल के प्रत्यर्पण का क्रेडिट पीएम मोदी के जेम्स बॉन्ड को दिया जा रहा हो, पर इसमें एक अहम वजह है शेखा लतीफा की घर वापसी। जी हां, बता दें कि शेखा लतीफा, यूएई के पीएम और दुबई के राजा शेख मुहम्मद बिन राशिद अल-माकतुम की बेटी हैं, जो इस साल के आखिर में दुबई से भाग गई थी (भागने की लगातार 7 साल की कोशिश के बाद)। वह फ्रांस अमेरिकी हर्व जुआबर्ट की बोट से गोवा तक आ गई। लेकिन तट से महज 30 मील की दूरी पर बोट को पकड़ लिया गया (बताया जाता है कि भारतीय कोस्टगार्ड ने यह काम किया)। इसके बाद उसे जबरदस्ती उसके घर पहुंचाया गया। उसके बाद से उसे न तो किसी ने देखा है और न ही किसी ने उसके बारे में कोई बात सुनी है। अपने पकड़े जाने से पहले एक वीडियो में उसने कहा था, ‘अगर आप यह विडियो देख रहे हैं या तो मैं मर चुकी हूं या फिर बहुत बुरी परिस्थिति में हूं।’Sushma Swaraj

एमनेस्टी इंटरनेशनल का दखल

जानकारी के मुताबिक, लतीफा के वकीलों ने यूएन से इस मामले में दखल देने की अपील की और ‘राजकुमारी’ के गायब होने के पीछे भारत और यूएई को जिम्मेदार बताया। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल का आरोप है कि ‘भारत के कमांडो ने बोट पर मौजूद सभी लोगों को बंदूक की नोक पर चुप रहने को कहा और शेखा को ले गए, जबकि वह राजनीतिक शरण की मांग कर रही थी।’

तो वहीं दूसरी ओर खबर ये भी है कि मिशेल के प्रत्यर्पण का निवेदन करीब 19 महीने पहले किया था। वहीं यूएई ने प्रत्यर्पण की सभी कार्रवाई इसी हफ्ते पूरी की हैं। मिशेल के खिलाफ नवंबर 2015 में रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था।

मिशेल के प्रत्यर्पण की असल दिक्कत

प्रत्यर्पण को लेकर इसलिए भी दिक्कत आ रही थी क्यों कि मिशेल ब्रिटिश नागरिक है और यूएई ने पहले ये कहकर भारत के निवेदन को नकार दिया था कि मिशेल ब्रिटिश नागरिक है, उसे भारत को नहीं सौंपा जा सकता है। भारत और यूएई के संबंधों में गहराई आई। इसका श्रेय पीएम मोदी और यूएई के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद को जाता है। बिन जायद ने मिशेल के प्रत्यर्पण में अहम भूमिका निभाई।

अजीत डोभाल का प्लान

ये भी बता दें कि अजीत डोभाल ने करीब एक साल पहले ही मिशेल के प्रत्यर्पण के लिए एक क्रैक टीम बनाई थी। इस टीम में सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर साई मनोहर समेत कुल चार सदस्य शामिल थे। इस टीम में सीबीआई के अलावा रॉ के भी अधिकारी शामिल थे। टीम के लिए उस समय मुश्किल खड़ी हो गई जब मिशेल के वकील में दुबई की कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखते हुए कहा कि मिशेल एक ब्रिटिश नागरिक हैं और उन्हें किसी तीसरे देश से भारत प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता, लेकिन इसी साल सितंबर में कोर्ट ने मिशेल के सभी दावों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा किया जा सकता है।

जानकारी के लिए बता दें कि प्रत्यर्पण को लेकर दुबई की कोर्ट ने 19 नवंबर को आदेश जारी कर दिया था, लेकिन पूरा मामला यूएई सरकार की मंजूरी को लेकर रुका था। यहीं पर भारत और यूएई के बीच बीते साल डेढ़ साल में मजबूत हुए रिश्ते का फायदा भारत को मिला। मिशेल के प्रत्यर्पण के लिए भारत सरकार ने यूएई सरकार पर दवाब डाला।

प्रत्यर्पण से तीन महीने पहले भारतीय एजेंसियों ने दुबई को सूचना दी कि किस तरह से मिशेल भागने की तैयारी में है। इस पूरे मामले में सुषमा स्वराज का यूएई दौरा भी एक अहम कड़ी की तरह है, हालांकि इससे पहले ही कोर्ट ने प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी लेकिन राजनयिक दवाब के बाद ये काम जल्दी हो गया।

इस मामले पर राजनयिकों का कहना है कि बड़े नेताओं की यात्राओं की बदौलत ही यह संभव हो सका। पीएम मोदी अगस्त 2015 में दुबई की ऐतिहासिक यात्रा पर थे। यहां पर उन्होंने नई रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की। इसके बाद अबु धाबी के कॉउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान 2016 की शुरुआत में भी भारत दौरे पर आए थे। इसके बाद प्रिंस 2017 के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनकर भी भारत आए थे।CBI

2017 में हुई मिशेल की गिरफ्तारी

यूएई प्रशासन ने भारत सरकार की तरफ से प्रत्‍यर्पण का अनुरोध मिलने पर फरवरी 2017 में मिशेल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से ही भारत सरकार उसे लाने के लिए कोशिशों में लगी हुई थी। इसके लिए सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के बड़े अधिकारियों ने कई बार यूएई का दौरा किया और वहां घोटाले से जुड़े साक्ष्य, आरोप-पत्र, गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेज रखे।Narendra modi and Mohammed bin Salman Al Saudi

जानकारी के लिए बता दें कि 2002 से अब तक 20 लोगों को सऊदी अरब से लाया जा चुका है। जिनमें 9 प्रत्यर्पण 10 साल प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले मनमोहन सिंह के कार्यकाल में हुए थे।

हालांकि संयुक्त अरब अमीरात से लाए गए क्रिश्चियन मिशेल का मामला अलग है। 2002 से अब तक हुए 20 में से 19 प्रत्यर्पण किए गए लोग भारतीय थे। जबकि मिशेल पहला गैर भारतीय है, जिसे यूएई से भारत लाया गया।

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