गेहूं का उत्पादन बढ़ने से किसान चिंतित, भाव कम मिलने का अंदेशा

सर्दी के मौसम में विस्तार और मार्च के शुरू में बारिश ने इस साल गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन होने की उम्मीद जगाई है, मगर किसान इस बात से चिंतित है कि उत्पादन ज्यादा होने से उनको फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पाएगा।

Written by Newsroom Staff March 15, 2019 10:59 am

नई दिल्ली। सर्दी के मौसम में विस्तार और मार्च के शुरू में बारिश ने इस साल गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन होने की उम्मीद जगाई है, मगर किसान इस बात से चिंतित है कि उत्पादन ज्यादा होने से उनको फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पाएगा। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल गेहूं का उत्पादन 10.5 करोड़ टन हो सकता है।

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास फरवरी में 239.31 लाख टन गेहूं का भंडार था जबकि पिछले साल फरवरी में एजेंसी के भंडार में 175.47 लाख टन गेहूं था। इस साल भंडार ज्यादा होने से गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई। अगर, सरकारी खरीद कम होती है तो गेहूं का बाजार भाव लुढ़क जाएगा जिससे किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पाएगा।

केंद्र सरकार ने फसल वर्ष 2018-19 में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य पिछले साल से 105 रुपये बढ़ाकर 1,840 रुपये प्रति क्विं टल तय किया है।

पंजाब के मानसा जिला स्थित बरेटा के किसान नजर सिंह ने कहा, “अगर, सरकार ने समय पर खरीद शुरू नहीं की तो हमें बाजार भाव पर गेहूं बेचना पड़ेगा जोकि आपूर्ति ज्यादा होने कम हो सकता है।”Women labourers collect wheat at a warehouse of Punjab State Civil Supplies Corporation Limited on the outskirts of the northern Indian city of Amritsar

अधिकारियों ने बताया कि मध्यप्रदेश के कुछ इलाकों में गेहूं की कटाई शुरू हो चुकी है और अप्रैल के पहले सप्ताह से देशभर में गेहूं की कटाई शुरू हो जाएगी।

किसान नेता केदार सिरोही ने कहा कि मौजूदा बाजार भाव के अनुसार बेहतर दाम मिलने की उम्मीद की जा सकती है लेकिन आपूर्ति बढ़ने पर आमतौर पर व्यापारियों की रणनीति बदल जाती है, इसलिए कीमतों में गिरावट आ सकती है।

कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने कहा कि किसान ज्यादा फसल उपजाते हैं तो उतनी आय नहीं मिलती है जितनी वह उम्मीद करते हैं इसलिए सही दाम पाने के लिए उनको उत्पादन में कटौती करनी पड़ती है।

उन्होंने कहा, “अगर वे लाभकारी मूल्य चाहते हैं तो उनको उत्पादन में कम से कम 10 फीसदी कटौती करनी चाहिए। यह राष्ट्रविरोधी नहीं है। आखिर उनको आजीविका के लिए जद्दाजहद करनी पड़ती है।”

भारतीय गेहूं व जौ अनुसंधान केंद्र के निदेशक जी.पी. सिंह ने कहा कि इस साल 10 करोड़ टन से ज्यादा गेहूं का उत्पादन होने का सपना पूरा होगा।

उन्होंने आईएएनएस से कहा, “सर्दी के मौसम में विस्तार और मार्च के पहले सप्ताह में बारिश होने से गेहूं के लिए मौसमी दशा अनुकूल हो गई, जिससे ज्यादा उत्पादन होने की उम्मीद है।”

उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि इस साल 10.5 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हो सकता है।”foodgrain production

हालांकि केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से पिछले महीने जारी फसल वर्ष 2018-19 की प्रमुख फसलों के दूसरे अग्रिम उत्पादन अनुमान के अनुसार, इस साल गेहूं का उत्पादन 991.2 लाख टन हो सकता है।

चीन के बाद भारत दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है। पिछले साल के दूसरे अग्रिम उत्पादन अनुमान के अनुसार देश में गेहूं का उत्पादन 971.1 लाख टन था। पिछले साल सरकारी एजेंसियों ने 358 लाख टन गेहूं की खरीद की थी।

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