पीएम मोदी की ‘ड्रीम स्कीम’ को रघुराम राजन ने नहीं दी क्लीन चिट

Written by: September 13, 2018 8:25 am

नई दिल्ली। करीब 4 साल पूरे होने के बाद मोदी सरकार अपनी जिन योजनाओं पर पीठ थपथपा रही है, उनमें से एक है मुद्रा योजना, जिसे सबसे प्रमुख मानते हुए इस योजना को बीजेपी लगातार सफल बताते रहे हैं। लेकिन एक संसदीय समिति को दिए अपने बयान में रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने यह चेतावनी दी है कि मुद्रा लोन, किसान क्रेडिट कार्ड जैसी मोदी सरकार की कई योजनाओं से बैंकों के एनपीए की स्थिति और बिगड़ सकती है। रघुराम राजन ने इसे मोदी की सबसे बड़ी खामी बताया है। राजन ने कहा है कि मुद्रा जैसी योजनाओं के चलते देश में एनपीए का खतरा बढ़ा है।

आपको बताते चलें की मोदी हाल के दिनों में लगातार मुद्रा योजना का जिक्र अपने भाषणों में भी करते रहे हैं। इस साल 15 अगस्त को लाल किले से देश के नाम संबोधन में मोदी ने कहा था कि हमारे देश के युवाओं ने आज प्रगति के सारे मापदंडों को बदल दिया है। नौजवानों ने नेचर ऑफ जॉब को बदल दिया है। नए क्षेत्रों से देश को ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। 13 करोड़ मुद्रा लोन दिए गए हैं। इनमें 4 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने पहली बार लोन लेकर स्वरोजगार शुरू किया है।

वहीं बैंक एनपीए को लेकर गठित संसद की इस्टिमेट कमेटी ने राजन से इसके बाद में जानकारी मांगी थी। इस पर राजन पिछले महीने इस समिति के सामने पेश हुए थे। यहां उन्होंने बैंक एनपीए पर खुलकर अपने विचार रखे थे। इससे पहले पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यम ने एनपीए संकट को पहचानने और इसका हल निकालने का प्रयास करने के लिए भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी की अगुवाई वाली संसद की इस्टिमेट कमेटी के सामने राजन की तारीफ की थी। इसके बाद समिति ने राजन को बुलाकर इस मसले पर जानकारी मांगी थी। राजन ने संसदीय समिति के सामने एनपीए को लेकर जो बातें रखी थीं, उसमें उन्होंने मुद्रा लोन जैसी स्कीम को एनपीए की अगली मुसीबत करार दिया है। राजन ने कहा कि सरकार को एनपीए की अगली क्राइसिस के सोर्स पर फोकस करना चाहिए। सरकार को धुआंधार लोन बांटने और कर्ज माफ करने जैसे कदमों से बचना चाहिए।

दरसअल मुद्रा और किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए कर्ज बांटने से भविष्य के एनपीए का खतरा बढ़ता है। इसके चलते भविष्य में और ज्यादा एनपीए बढ़ सकता है। राजन ने सिडबी की ओर से एमएसएमई को दिए जाने वाले क्रेडिट गारंटी वाले लोन पर भी सवाल उठाए हैं।