पायलट Vs गहलोत: क्या पायलट खुद को समझते हैं गहलोत से बड़ा नेता!.. किसको मिलेगा सिंहासन, देखिए रिपोर्ट

नई दिल्ली। राजस्थान में माना जाता है कि सचिन पायलट पर राहुल गांधी का हाथ है, लेकिन इसमें भी कोई शक नहीं कि वर्तमान में राहुल के सबसे मजबूत ‘हाथ’ अशोक गहलोत हैं। वर्तमान में राजस्थान की राजनीति में मास लीडर के तौर पर यदि किसी का नाम सबसे ऊपर होगा तो वो अशोक गहलोत ही होंगे। राजनीतिक रूप से अल्पसंख्यक और कमजोर जाति से आने वाले गहलोत ने अपने कार्यकाल में राजस्थान में ऐसा जादू चलाया जिसकी काट अभी किसी के पास नहीं है। गहलोत का राजनीतिक कौशल ही था कि 1998 में मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार परसराम मदेरणा को पीछे छोड़ते हुए वे सत्ता के शिखर पर पहुंचे।

पिछड़ी जातियों में गहलोत सर्वमान्य नेता

भले ही राजस्थान में मृतप्राय पड़ी पार्टी में जान फूंकने में पायलट सफल रहे हों लेकिन राजस्थान की जनता के सामने अभी उन्हें खुद को साबित करना बाकी है। राज्य की पिछड़ी जातियों में गहलोत सर्वमान्य नेता हैं। बड़ी और प्रभावी जातियों के समीकरण को तोड़ते हुए अपनी तैयार की हुई राजनीतिक जमीन वे किसी हाल में छोड़ने के मूड में नहीं है।

हालांकि गहलोत को ये भली भांति ज्ञात है कि भले ही वो अभी भी कांग्रेस महासचिव हो, पर अब वो पुरानी बात नहीं रही जिसमें वे बिना विधानसभा चुनाव लड़े मुख्यमंत्री बन गए थे। इसके पीछे भी इतिहास है कि जब 2008 के चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी का मुख्यमंत्री बनना तय था तब वे एक वोट से विधानसभा चुनाव हार गए थे, ऐसे में गहलोत को ही मुख्यमंत्री बनाया गया था क्योंकि वे विधायक चुने गए थे।

पायलट ने जमीन पर काम किया

अजमेर से लोकसभा चुनाव हारने के बाद जब सचिन पायलट को राजस्थान कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया तब पार्टी के भीतर उनका मुकाबला अशोक गहलोत और सीपी जोशी से था, दोनों ही राहुल गांधी के भरोसेमंद सिपहसलार और रणनीतिज्ञ माने जाते थे। साथ ही पायलट की छवि पैराशूट से उतरे नेता के तौर पर देखी जा रही थी, जिसकी कोई जमीनी पकड़ नहीं थी।

इन सब वजहों के बावजूद सचिन पायलट ने राज्य में अर्श से फर्श पर पड़ी पार्टी को जीत के मुहाने ला खड़ा किया है. उनके नेतृत्व में पार्टी हर उपचुनाव जीती। पायलट की इस सफलता के पीछे कई वजहें रहीं जिसमें पहली वजह यह थी कि उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर काम करने का पांच साल का लंबा वक्त मिला

Rahul Gandhi, Sachin And Ashok Gehlot

पायलट के मुकाबले गहलोत का पलड़ा क्यों है भारी?

चूंकि राजस्थान की जनता सचिन पायलट को जिस तराजू में तौलेगी उसमें पहले से ही अशोक गहलोत बैठे हैं, लिहाजा तराजू गहलोत की तरफ ही झुकेगा। इसके पीछे की वजह साफ है पायलट पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं। अजमेर से लोकसभा सांसद रह चुके हैं और उनके पिता दौसा से सांसद रह चुके हैं। पायलट की एक कमजोरी ये है कि उन्हें बाहरी समझा जाता है, क्योंकि वे मूलत: राजस्थान के नहीं बल्कि यूपी के नोएडा के रहने वाले हैं और 80 के दशक में उनके पिता राजेश पायलट ने दौसा में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की। लिहाजा सचिन पायलट के पास ऐसी कोई सेफ सीट नहीं है जिससे वे सीट पर जाए बिना चुनाव जीत जाएं।

जबकि अशोक गहलोत जिस समुदाय का नेतृत्व करते हैं वो शांत माना जाता है और पिछड़ी जातियां उनके नेतृत्व में खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं। बता दें कि अशोक गहलोत तो खुद विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लिहाजा सचिन पायलट को भी चुनाव लड़ाया गया।

पायलट खुद को समझते हैं गहलोत से बड़ा नेता!

हाल ही में जब अशोक गहलोत ये ऐलान कर रहे थे कि इस बार दोनों ही विधानसभा चुनाव लड़ेगे, तब सचिन पायलट उनके बगल में ही बैठे थे। चुनाव लड़ने के बारे में सचिन पायलट ने कहा, ‘राहुल गांधी जी के आदेश के बाद और अशोक गहलोत जी के निवेदन पर मैं इस बार विधानसभा चुनाव लड़ूंगा। राहुल गांधी जी का आदेश और अशोक गहलोत जी का निवेदन’, सचिन पायलट के ये शब्‍द बताते हैं कि अब वो खुद को बड़ा नेता मानते हैं। और इस बार राजस्थान चुनाव में वो खुद को गहलोत से बड़ा नेता मानकर चल रहे हैं।Rahul Gandhi, Sachin And Ashok Gehlot

दोनों की गुटबंदी से कांग्रेस को बड़ा नुकसान

भले ही प्रदेश में दोनों सीएम पद के दावेदार हैं। पर जिस तरह पायलट अपना कद गहलोत से बड़ा मानकर चल रहे हैं, उससे कांग्रेस के आम कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई हैं, चूंकि पायलट गुट उनको सीएम मानकर चल रहा है, तो वहीं दूसरी ओर गहलोत गुट काफी हद तक आश्वस्त है कि सीएम तो उनका ही नेता बनेगा। ऐसे में आम लोग परेशान है कि वो अगर दोनों आपसी खींचतान में उलझे रहे, तो इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है।चूंकि बीजेपी लगातार हमलावर है, कि कांग्रेस में एक दो नहीं बल्कि कई नेता सीएम पद के दावेदार हैं। गृहमंत्री राजनाथ पहले ही कह चुके हैं कि राजस्थान में कांग्रेस बिना दुल्हे के बारात निकाल रही है। तो वहीं कांग्रेस आलाकमान के सामने भी स्थिति भी काफी उलझी हुई है कि अगर कांग्रेस जीत गई तो आगे की राह काफी कांटों भरी होगी।Ashok Gehlot and Sachin Pilotये भी बता दें कि कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच किसी भी तरीके का टकराव टालने के लिए पार्टी ने गहलोत को केंद्रीय संगठन में भेज दिया था, लेकिन गहलोत बीच में अपनी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं।

200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा के चुनाव के लिए सात दिसंबर को मतदान होना है। नतीजों की घोषणा 11 दिसंबर को की जाएगी, राज्य में फिलहाल भाजपा सत्ता में है।

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