सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों के आरोपों पर क्या बोले कानून के जानकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस किए जाने और सुप्रीम कोर्ट की कार्यशैली पर सवाल उठाए जाने की खबर ने लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ को हिला कर रख दिया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मुख्य न्यायाधीश पर बड़ा आरोप लगाया। चारों जजों ने कहा कि देश में लोकतंत्र खतरे में है। सुप्रीम कोर्ट सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। हमने इस विषय में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) से भी बात करने की कोशिश की लेकिन हम नाकामयाब रहे है।

इंदिरा जय सिंहः सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील
मुझे लगता है कि यह ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस थी, यह बहुत अच्छा हुआ, मुझे लगता है हम भारतवासियों को यह अधिकार है कि हमारी न्याय व्यवस्था में क्या चल रहा है और मैं इसका स्वागत करती हूं।

जस्टिस मुकुल मुदगल(रि.), हाईकोर्ट के पूर्व जज
इसके पीछे कोई बड़ा कारण ही रहा होगा, जब इन चारों जजों को कोई और विकल्प नहीं दिखा होगा तो उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई होगी। लेकिन इसका लोया मामले से क्या संबंध है? मैं इसके बारे में कुछ भी नहीं जानता हूं और ना मैं किसी भी राजनीतिक मामले पर कोई टिप्पणी करना चाहता हूं।

पीबी सावंतः सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज
इन जजों का मीडिया के सामने आने के लिए मजबूर होना, एक अप्रत्याशित घटना है, इससे यह प्रतीत होता है कि कहीं कोई बड़ा मामला है, चाहे वह मुख्य न्यायाधीश से जुड़ा हुआ हो या फिर कोई आंतरिक मामला हो।

सलमान खुर्शीद, वरिष्ठ वकील व कांग्रेस नेता
मुझे इस बात से बहुत दुख हुआ कि शीर्ष अदालत भी इस तरह के तनाव से गुजर रही है और जजों को मीडिया से सामने आकर अपनी बात रखनी पड़ रही है।

उज्ज्वल निकम, वरिष्ठ सरकारी वकील
यह न्यायपालिका के लिए काला दिन है,आज हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस एक गलत मिसाल का कारण बनेगी। इससे कानून पर से लोगों का भरोसा डिगेगा, हर कोई कोर्ट के फैसले को शंका भरी नजरों से देखेगा।

सुब्रमण्यम स्वामी, वरिष्ठ वकील, भाजपा सांसद
बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है, ‘हम उनकी आलोचना नहीं कर सकते है, ये सब वो व्यक्ति हैं जिनका कार्यकाल पूरी ईमानदारी और बलिदान का साक्षी रहा है, अपने लीगल करियर में वह वरिष्ठ वकील के रूप में बहुत पैसा बना सकते थे। हमें उनका सम्मान करना चाहिए।

जस्टिस (रि.) आर एस सोढ़ी, हाईकोर्ट के पूर्व जज
जस्टिस (रि.) आर एस सोढ़ी ने मीडिया से कहा है कि इन चारों जजों के खिलाफ महाभियोग चलाए जाए। रिटायर्ड जस्टिस आरएस सोढ़ी का कहना है कि इन चारों जजों को अब किसी भी तरह से उनका पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। इन्हें पद से हटाया जाना चाहिए इनके द्वारा फैसला सुनाना उचित नहीं है।

प्रशांत भूषण, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने मीडिया चैनल से बातचीत में कहा, ‘मैंने पिछले 35 साल से सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई को देखा है, ऐसी स्थिति कभी नहीं रही। कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई जज यह तय करे कि कौन सा जज कौन सा केस करेगा। आज सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश यह तय कर रहे हैं कि कौन सा जज, कौन सा केस करे।

केटीएस तुलसी, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील
वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी ने कहा, अगर एक आम आदमी के लिए न्याय होता है तो एक जज के लिए भी न्याय उतना ही होता है। उन्होंने कहा कि चारों जजों के चेहरों पर दर्द साफ छलक रहा था, जज हर तरह के भेदभाव से उपर होता है।

Facebook Comments