पांच साल में 17 फीसदी छोटे हो गए फ्लैट, लेकिन नहीं घटी कीमत

40 लाख रुपये तक कीमत वाले मकानों के आकार में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज हुई है। हालांकि दूसरे शहरों में भी बिल्डर तेजी से मकानों का आकार घटा रहे हैं, लेकिन एनसीआर में छोटे घरों की डिमांड और युवाओं की खरीद क्षमता में इजाफे को इसका बड़ा कारण माना जा रहा है।

Written by Newsroom Staff March 14, 2019 1:31 pm

नई दिल्ली। अफोर्डेबल हाउसिंग की बढ़ती डिमांड, मार्केट में रिकवरी और बढ़ती कीमतों का असर प्रॉपर्टी मार्केट में मकानों के साइज पर भी पड़ रहा है। दिल्ली-एनसीआर में पिछले पांच साल में फ्लैटों का औसत साइज 17% तक घट गया है। हालांकि इस दौरान कीमतों में किसी तरह की कोई कमी देखने को नहीं मिली है। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म एनॉरॉक द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान सबसे ज्यादा घर देश की आर्थिक राजधानी में छोटे हुए हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक 40 लाख रुपये तक कीमत वाले मकानों के आकार में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज हुई है। हालांकि दूसरे शहरों में भी बिल्डर तेजी से मकानों का आकार घटा रहे हैं, लेकिन एनसीआर में छोटे घरों की डिमांड और युवाओं की खरीद क्षमता में इजाफे को इसका बड़ा कारण माना जा रहा है।

बता दें, इनके साइज में 23 फीसदी की कमी देखी गई है। जो मकान इतनी कीमत में 750 वर्ग फीट का मिलता था, वो 2018 में घटकर केवल 580 वर्ग फीट रह गया है। 40 से 80 लाख रुपये कीमत वाले घरों के आकार में 17 फीसदी गिरावट आई है। 2014 में ये 1,150 वर्ग फीट के होते थे। 2018 में 950 वर्ग फीट के रह गए। 80 लाख से ज्यादा कीमत वाले घरों का आकार 20 फीसदी कम हुआ है।

ऐनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट के मुताबिक देश के सात बड़े शहरों में मकानों के औसत साइज में पांच साल में 17% की गिरावट आई है। सबसे ज्यादा 27% की गिरावट मुंबई मेट्रो रीजन में देखने को मिली है। पुणे, कोलकाता और बेंगलुरु में मकानों का औसत साइज बीते पांच साल में क्रमशः 22%,23% और 12% घटा है। सबसे बड़े आकार के फ्लैटों के मामले में हैदराबाद अव्वल है, जहां औसत साइज 1600 वर्गफुट बना हुआ है। हालांकि पांच साल पहले यहां औसत साइज 1800 वर्गफुट हुआ करता था।

मकानों के घटते आकार के पीछे अफोर्डेबल हाउसिंग की बढ़ती डिमांड को बड़ा कारण बताया जा रहा है। ऐनारॉक चेयरमैन अनुज पुरी ने बताया कि एनसीआर जैसे इलाकों में जहां बजट-फ्रेंडली घरों की मांग बढ़ी है और अब कीमतें भी ऊपर का रुख कर रही हैं, ज्यादातर डिवेलपर डिमांड पूरी करने के मकसद से घरों का आकार घटा रहे हैं।

वहीं दूसरी बड़ी वजह यह देखने में आ रही है कि युवा खरीदार ऊंची मेंटेनेंस कॉस्ट से बचना चाहते हैं और पहली खरीद पर उनमें बहुत बड़े घरों की चाह नहीं दिख रही। युवा प्रोफेशनल्स करियर को ज्यादा तवज्जो देते हैं और उनके शहर या इलाका बदलने की संभावना ज्यादा रहती है।

ऐसे में छोटे घरों को बेचना या होल्ड करना आसान होता है। बड़े शहरों में लिव-इन रिलेशंस का ट्रेंड बढ़ रहा है और कई कपल अपने घर में रहना चाहते हैं। उनका रुझान भी छोटे घरों में होता है, यह भी एक वजह है कि मार्केट ऐसे घरों के निर्माण में दिलचस्पी दिखा रहा है। छोटे या कॉम्पैक हाउसिंग की रिसेल के आसार सबसे ज्यादा होते हैं और इन्हें रेंट पर उठाना भी ज्यादा आसान होता है। यह वजह भी घरों का आकार घटाने में कारगर है।

 

Facebook Comments