एनबीएफसी संकट: घट सकती है रियल्टी सेक्टर की फंडिंग

‘इस वर्ष की शुरुआत में कुछ झटके लगने के बाद एनबीएफसी का बिजनेस पटरी पर लौटता दिख रहा था और जैंडर, केकेआर और टाटा कैपिटल जैसे फंड्स ने चुनिंदा बिल्डर्स को कैपिटल देनी शुरू की थी। हालांकि, यह लेंडिंग कड़े क्रेडिट नॉर्म्स पर आधारित था और फोकस विशेष प्रॉजेक्ट के बजाय कंपनी की वित्तीय ताकत पर था।

Written by: June 10, 2019 3:26 pm

नई दिल्ली। जहां एक ओर रियल्टी सेक्टर फाइनेंस की कमी का सामना कर रहा है। वहीं दूसरी ओर इस सेक्टर के लिए एक और बूरी खबर है। जी हां, लिक्विडिटी यानि की फाइनेंस की कमी का सामना कर रहे रियल एस्टेट सेक्टर के लिए नॉन-बैकिंग फाइनेंस कंपनियों एनबीएफसी से फंडिंग और घटने की आशंका जताई जा रही है। हाउसिंग फाइनेंस कंपनी डीएचएफएल की रेटिंग हाल ही में डाउनग्रेड होने के बाद अन्य एनबीएफसी सतर्क हो गई है। इससे फंडिंग को लेकर रियल एस्टेट सेक्टर की चुनौतियां और बढ़ सकती है। हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के रेट कट करने और सरकार के कुछ उपायों से इस सेक्टर में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही थी।

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रियल एस्टेट कंसल्टंसी JLL के चीफ इकॉनमिस्ट (रिसर्च ऐंड REIS) सामंतक दास ने कहा, ‘इकॉनमी की वित्तीय स्थिरता की जिम्मेदारी आरबीआई  पर है और इस वजह से हमें इस मुश्किल से निपटने के लिए आरबीआई की ओर से कुछ उपाय करने की उम्मीद है।’इस वर्ष की शुरुआत में कुछ झटके लगने के बाद एनबीएफसी का बिजनेस पटरी पर लौटता दिख रहा था और जैंडर, केकेआर और टाटा कैपिटल जैसे फंड्स ने चुनिंदा बिल्डर्स को कैपिटल देनी शुरू की थी। हालांकि, यह लेंडिंग कड़े क्रेडिट नॉर्म्स पर आधारित था और फोकस विशेष प्रॉजेक्ट के बजाय कंपनी की वित्तीय ताकत पर था।

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एक इंटरनेशनल एनबीएफसी के मैनेजिंग डायरेक्टर ने बताया, ‘सेक्टर के लिए फंडिंग सितंबर 2018 से 80 पर्सेंट घटी है। पिछले छह महीनों में एवरेज टिकट साइज कम से कम 60 पर्सेंट कम हुआ है।’ रेजिडेंशियल रियल एस्टेट सेक्टर के लिए भी संभावनाएं बेहतर होती दिखी थी और कुछ लिस्टेड रिएल्टी कंपनियों ने वित्त वर्ष 2019 की अंतिम तिमाही में मुनाफा दर्ज किया था। मार्च तिमाही में हाउसिंग सेल्स पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 28 पर्सेंट बढ़कर 38,600 यूनिट रही थी।

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बैंकों की तुलना में एनबीएफसी/हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों का बढ़ता महत्व इससे पता चलता है कि इनका रियल एस्टेट डिवेलपर्स को बकाया क्रेडिट फाइनेंशियल ईयर 2011-12 में 36 पर्सेंट से फाइनेंशियल ईयर 2017-18 में बढ़कर 58 पर्सेंट पर पहुंच गया था। हालांकि, सितंबर 2018 में IL&FS संकट के कारण सेक्टर को एनबीएफसी की ओर से लेंडिंग में काफी कमी आई है। रियल एस्टेट पर फोकस करने वाले बुटीक इन्वेस्टमेंट बैंक एलिसिम कैपिटल के फाउंडर सुभाष उधवानी ने कहा, ‘एनबीएफसी में हाल के घटनाक्रम से रियल एस्टेट की फाइनेंसिंग को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। चुनाव के बाद स्थिर सरकार बनने से रियल्टी सेक्टर में तेजी आने की उम्मीद थी लेकिन अब ऐसा होता नहीं दिख रहा है।’

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हालांकि, इसके साथ ही उनका कहना है कि अगले 12 महीनों में रिटेल बायर्स के लिए मोलभाव करने और अच्छे प्राइसेज पर प्रॉपर्टी खरीदने का बेहतर मौका है। IL&FS संकट से पहले रियल एस्टेट को कर्ज देने वाली 15 बड़ी NBFC थी। यह संख्या घटकर अब लगभग छह पर आ गई है।