रेरा कानून के दो साल पूरे होने पर रीयल एस्टेट क्षेत्र में आया बदलाव

बता दें कि रीयल एस्टेट क्षेत्र में रीयल एस्टेट नियमन और विकास कानून (रेरा) 2016 को एक मई 2017 से लागू किया गया था। सबसे पहले महाराष्ट्र सरकार ने ‘महा रेरा’ नाम से राज्य में इस कानून को लागू किया था।

Written by Newsroom Staff May 12, 2019 2:17 pm

नई दिल्ली। पिछले कुछ सालों से रीयल एस्टेट क्षेत्र में कई धोखाधड़ी के मामले सामने आएं थे जिसके बाद लोगों का रीयल एस्टेट क्षेत्र और बिल्डरों से विश्वास उठ सा गया था। केन्द्र में जब मोदी सरकार आई तो इस मामले को ध्यान में लेते हुए सरकार ने रेरा कानून को लागू किया ताकि इस सेक्टर में जनता को हो रही धोखाधड़ी से बचाया जा सकें।

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ग्राहकों के साथ लगातार धोखाधड़ी बढ़ने की वजह से केंद्र की मोदी सरकार ने रेरा कानून को दो साल पहले यानि की एक मई 2017 को लागू किया था। उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि रेरा कानून लागू होने के दो साल बीत जाने के बाद अब रियल एस्टेट क्षेत्र में मांग बढ़ने से राहत दिखाई देने लगी है।

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रेरा लागू होने के बाद शुरू हुई कई नई योजनाएं

देश के आठ महानगरों में रेरा लागू होने के बाद साल 2016 की दूसरी छमाही में जहां 68,702 आवासीय इकाइयों की परियोजनाएं शुरू हुई, वहीं 2017 की दूसरी छमाही में यह संख्या घटकर 40,832 इकाइयों की रह गई। इसके बाद साल 2018 की दूसरी छमाही में स्थिति में सुधार देखा गया। 2018 में 89,509 फ्लैट के लिए नई परियोजनाएं शुरू की गईं। वहीं 2018 की पहली छमाही में 91,739 नई इकाइयों के लिए परियोजनायें शुरू हुईं। वर्ष 2017 की पहली और दूसरी छमाही में यह संख्या क्रमश: 62,738 और 40,832 रही थी।

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एक मई 2017 को लागू किया गया था रेरा कानून

बता दें कि रीयल एस्टेट क्षेत्र में रीयल एस्टेट नियमन और विकास कानून (रेरा) 2016 को एक मई 2017 से लागू किया गया था। सबसे पहले महाराष्ट्र सरकार ने ‘महा रेरा’ नाम से राज्य में इस कानून को लागू किया था।

इतने राज्यों ने अधिसूचित किया रेरा कानून

एनारोक प्रापर्टी कंसल्टेंट्स के आंकड़ों के मुताबिक 22 राज्यों और छह संघ शासित प्रदेशों ने अपने रेरा कानून अधिसूचित कर दिए हैं। इनमें से 19 राज्यों के सक्रिय पोर्टल हैं। बंगाल में भी अब उसका सक्रिय पोर्टल है।

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बहुत दिनों से इस क्षेत्र में बिक्री कम हो गई और परियोजनाएं  नए कानून के तहत समयसीमा के भीतर काम पूरा करने के लिये जद्दोजहद करने लगी।’’

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आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2018 में आंध्र प्रदेश में जहां 61 परियोजनाएं रेरा के तहत पंजीकृत हुई वहीं अब इनकी संख्या 307 तक पहुंच गई। गुजरात में 5,317 रेरा पंजीकृत परियोजनाएं और 899 पंजीकृत एजेंट और एजेंसियां हैं। महाराष्ट्र में इस समय 20,718 परियोजनाएं, 19,699 एजेंट रेरा के तहत पंजीकृत हैं। वही कर्नाटक में रेरा पंजीकृत परियोजनाएं 2,530 और एजेंट 1,342 तक पहुंच गए। आने वाले समय में इस कानून के तहत और भी कई बदलाव आएगा जिससे जनता को काफी आराम मिलेगा।

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