इस सेक्टर में नहीं बिक रहे निमार्णाधीन मकान, ये है असली वजह

भले ही केंद्र सरकार ने आपके सपनों के घर को पूरा करने के लिए 25 हजार करोड़ रुपये के फंड के लिए मंजूरी दे दी हो लेकिन अभी तक अधूरे पड़े मकानों में काम तक शुरू नहीं किया गया है। वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञ इस ढ़िलाई की वजह कुछ और ही बता रहे हैं।

Written by: November 8, 2019 2:13 pm

नई दिल्ली। भले ही केंद्र सरकार ने आपके सपनों के घर को पूरा करने के लिए 25 हजार करोड़ रुपये के फंड के लिए मंजूरी दे दी हो लेकिन अभी तक अधूरे पड़े मकानों में काम तक शुरू नहीं किया गया है। वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञ इस ढ़िलाई की वजह कुछ और ही बता रहे हैं।

House under construction

दरअसल रियल एस्टेट के संकट का कारण निर्माणधीन मकानों की बिक्री न होना बताया जा रहा है। इतना ही नहीं उनके मुताबिक कई सालों तक लगातार ईएमआई चुकाने के बावजूद घरों के न मिलने से खरीदारों का निर्माणाधीन परियोजनाओं से भरोसा उठ चुका है। ऐसी अधूरी परियोजनाओं के घर न बिकने से बिल्डरों को पूंजी नहीं मिल पा रही है। यहां तक कि अधूरी परियोजनाओं में अगर कुछ संख्या में फ्लैट तैयार भी हैं तो भी खरीदार उसमें गाढ़ी कमाई नहीं फंसाना चाहते। वे बिजली, पानी, सड़क जैसी सभी नागरिक सुविधाओं से लैस परियोजना में ही तैयार घर खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

Nirmala Sitharamanगौर हो कि हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अधूरी पड़ी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 25,000 करोड़ रुपये का एक विशेष फंड बनाने का ऐलान किया था। जिसमें सरकार वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) के तौर पर 10,000 करोड़ का योगदान देने की बात भी कही गई थी।

real estate House under construction

साथ ही कहा गया था कि बाकी 15,000 करोड़ के फंड के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) सहयोग करेंगे। बाद में इसमें और भी संस्थान जुड़ सकेंगे व फंड की राशि भी बढ़ाई जा सकेगी।

real estate
वहीं दूसरी ओर डेवलपर जहां मौजूदा तैयार या अधूरे घरों की बिक्री की कोशिश में हैं, वहीं ज्यादातर खरीदार पुराने निर्माणाधीन घरों से जुड़ी परियोजनाओं में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। जिन क्षेत्रों में घर नहीं बिके हैं, वहां बिजली-पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं पूरी नहीं हैं।