भारत के रूस के साथ इस कदम से लग जाएगी अमेरिका को मिर्ची, उड़ेगी चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की नींद

नई दिल्ली। भारत ने रूस में बने लंबी दूरी के एस-400 ट्रिम्फ़ एयर डिफेंस सिस्टम ख़रीदने की पूरी तैयारी कर ली है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इसी हफ़्ते भारत पहुंच रहे हैं। कहा जा रहा है कि पुतिन के इसी दौरे में दोनों देश इस सौदे की घोषणा कर सकते हैं। इस करार के बाद पाकिस्तान और चीन की नींद उड़ना तय है। Modi-Putin

इस बात की जानकारी देते हुए क्रेमलिन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पुतिन 4 अक्टूबर को भारत जाएंगे। इस यात्रा का एक मकसद लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली एस-400 मिसाइल बेचने का करार किया जाना भी है।s400 Missile

भारत का यह सौदा अमेरिका से विवाद का कारण भी बन गया है। भारत और अमरीका के बीच हुए ‘टू-प्लस-टू’ बैठक में रूस से इस सौदे की चर्चा केंद्र में रही थी। अमेरिका नहीं चाहता है कि भारत रूस से यह रक्षा सौदा करे। पिछले महीने 6 सितंबर को नई दिल्ली में ‘टू-प्लस-टू’ बैठक में अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो और अमरीकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस के साथ भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की बैठक हुई थी।S 400

कहा जा रहा है कि इस सौदे के कारण अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंध का ख़तरा भारत पर मंडरा रहा है, लेकिन फिर भी भारत पांच एस-400 ख़रीदने के आख़िरी चरण में पहुंच गया है। भारत ने संकेत दिए हैं कि वह अमेरिका से इस संबंध में विशेष छूट की मांग कर सकता है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने पिछले हफ्ते ही इशारों में कह दिया था कि भारत को छूट मिल ही जाएगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

भारत सालों से लंबी दूरी की हवाई सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए एस-400 चाह रहा है। 2016 में भी रूस के साथ एस-400 ख़रीदने के लिए द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। कहा जा रहा है कि जब चार और पांच अक्तूबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे तो इस सौदे पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। ये बात भी कही जा रही है कि भारत इस सौदे पर अमेरिकी प्रतिबंधों को आड़े नहीं आने देना चाहता है।

क्यों खास है एस-400 ट्रिम्फ़ एयर डिफेंस सिस्टम

एस-400 में मिसाइल दागने की क्षमता पहले से ढाई गुना ज़्यादा तेज़ है। इसके साथ ही यह एक साथ 36 जगहों पर निशाना लगा सकता है। इसके अलावा इसमें स्टैंड-ऑफ़ जैमर एयरक्राफ़्ट, एयरबोर्न वॉर्निंग और कंट्रोल सिस्टम एयरक्राफ़्ट है। यह बैलिस्टिक और क्रूज़ दोनों मिसाइलों को बीच में ही नष्ट कर देगा।”s400 Missile

एस-400 रोड मोबाइल है और इसके बारे में कहा जाता है कि आदेश मिलते ही पांच से 10 मिनट के भीतर इसे तैनात किया जा सकता है। यही सारी ख़ूबियां एस-400 को पश्चिम में बने उच्चस्तरीय डिफेंस सिस्टम, जैसे- टर्मिनल हाई एल्टिट्यूड एरिया डिफेंस सिस्टम (टीएचएएडी) और एमआईएम-104 से अलग बनाती हैं।

बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम

एस-400 को दुनिया के सबसे प्रभावी एयर डिफेंस सिस्टम माना जाता है। यह दुश्मनों के मिसाइल हमले को रोकने का काम करता है। कहा जा रहा है कि अगर भारत ने इस सौदे की घोषणा कर दी तो अमेरिका के लिए यह बहुत निराशाजनक होगा।s400 Missile

उधर रूस की सरकारी समाचार एजेंसी स्पूतनिक का कहना है कि राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे से पहले नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सुरक्षा पर बनी कैबिनेट कमेटी ने रूस से 5 अरब डॉलर से ज़्यादा के पांच एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की ख़रीद को मंजूरी दे दी है।US-India-22-dialogue

अमरीका ने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में कथित रूसी हस्तक्षेप को लेकर रूस के ख़िलाफ़ अगस्त 2017 में काउंटरिंग अमरीकाज़ अडवर्सरीज थ्रु सैंक्शंस एक्ट (सीएएटीएसए) क़ानून पास किया था। इस क़ानून को अमरीका ने रूसी सरकार को सज़ा देने के लिए पास किया था। सीएएटीएसए जनवरी 2018 से प्रभावी हो गया है। भारत चाहता है अमेरिका रूस के साथ उसके संबंधों में इस क़ानून से छूट दे। अमेरिका का यह क़ानून उन देशों को रोकता है जो रूस के साथ हथियारों का सौदा करते हैं। अमेरिका ने हाल ही में यूएस नेशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट (एनडीएए) पास किया था, जो ट्रंप प्रशासन को उन देशों को सीएएटीएसए के तहत छूट देने का प्रावधान देता है जिनका रूस से रक्षा संबंध बहुत पुराना है।

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