आध्यात्मिक गुरू दादा वासवानी का निधन

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पुणे। सिंधी समुदाय के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु, दार्शनिक, समाज सेवी साधु जे.पी.वासवानी का गुरुवार को निधन हो गया। वह कुछ समय से बीमार चल रहे थे। वह 99 वर्ष के थे। एक आधिकारिक प्रवक्ता ने आईएएनएस से कहा, “दादा वासवानी जी ने आज (गुरुवार को) सुबह 9.01 बजे आखिरी सांस ली। उनका पार्थिव शरीर उनके आश्रम साधु वासवानी मिशन में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है।”

dada vaswaniउन्हें एक निजी अस्पताल में कुछ दिनों पहले उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से भर्ती कराया गया था व उन्हें बुधवार को छुट्टी दी गई थी। वासवानी का 2 अगस्त को 100वां जन्म दिन था। इसके लिए बड़ी योजनाएं बन रही थीं, जिसमें दुनिया भर के उनके भक्तों के भाग लेने की उम्मीद थी।

वासवानी का जन्म 2 अगस्त 1918 को हैदराबाद में एक सिंधी दंपति पहलाजराए व कृष्णा देवी वासवानी के घर हुआ था। वह अपने माता-पिता की सात संतानों में एक थे। उन्होंने साधु वासवानी मिशन का नेतृत्व किया। इसकी स्थापना उनके चाचा व आध्यात्मिक गुरु दिवंगत साधु टी.एल.वासवानी ने हैदराबाद (सिंध, पाकिस्तान) में 1929 में की थी। इसकी शाखाएं अब दुनिया भर में हैं।

उनके 1966 में निधन के बाद, साधु जे.पी.वासवानी उनके उत्तराधिकारी बने और उन्होंने गुरु मिशन की विरासत को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाया।

विश्व शांति, शाकाहार, लड़कियों की शिक्षा, गरीबों के प्रति करुणा के समर्थक होने के साथ साधु वासवानी ने लंदन में ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स, ऑक्सफोर्ड में आध्यात्मिक नेताओं के वैश्विक फोरम, शिकागो में विश्व धर्म संसद, संयुक्त राष्ट्र में धार्मिक व आध्यात्मिक नेताओं के मिलेनियम विश्व शांति शिखर सम्मेलन व दक्षिण अफ्रीका में विश्व धर्म की संसद को संबोधित किया था।

dada vaswani

उन्होंने वैश्विक शांति की पहल, शांति का क्षण, शुरू की जिसमें 2 अगस्त को लोग सभी को क्षमा करने के लिए दो मिनट का मौन रखते हैं। इसमें दलाई लामा जैसे प्रसिद्ध व्यक्ति भाग लेते रहे हैं।

साधु वासवानी को विभिन्न राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए थे, जिमें यू थांट पीस अवॉर्ड 1998, पोप जॉन पाल द्वितीय के साथ संयुक्त रूप से प्राप्त हुआ था।

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने साधु वासवानी के निधन पर शोक जताया

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंधी आध्यात्मिक गुरु साधु जे.पी.वासवानी के निधन पर शोक जताया है। आध्यात्मिक गुरु वासवानी का गुरुवार को पुणे में निधन हो गया।

राष्ट्रपति कोविंद ने एक संदेश में कहा, “हमारे समाज में बहुत ज्यादा योगदान देने वाले आध्यात्मिक गुरु दादा जे.पी. वासवानी के निधन की खबर सुनकर दुखी हूं। उन्होंने अपना जीवन मानवता की भलाई, सरल जीवन, उच्च विचार व शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए समर्पित कर दिया।”

राष्ट्रपति कोविंद ने 99 साल के वासवानी के अनगिनत अनुयायियों के प्रति अपनी संवेदना जताई।

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा, “दादा वासवानी के निधन दुख को व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है। वह समाज के लिए जिए और गरीबों व जरूरतमंदों की करुणा के साथ सेवा की। उन्होंने लड़कियों की शिक्षा व स्वच्छता के लिए काफी कार्य किए।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि वह साधु वासवानी के साथ करीब 28 साल पहले विश्व धार्मिक सम्मेलन में शामिल हुए थे।

प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं दादा वासवानी को याद करने वाले उन लाखों लोगों में खुद को शामिल करता हूं, जिनके जीवन को उन्होंने प्रभावित किया है। उनके विचार, शिक्षाएं व सामाज सेवा कायम रहेगी और उनके मूल्यों व कार्यो को उजागर करेगी।”dada vaswani and Narendra Modi

महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.वी.राव ने कहा कि दादा वासवानी के निधन की खबर से वह बेहद दुखी हैं।

राव ने कहा, “वह विश्व बंधुत्व, शांति व करुणा के प्रतीक थे। अपने व्याख्यान, लेखन व जन सेवा के जरिए उन्होंने लाखों भारतीयों व विदेशी लोगों को सार्थक जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित किया।”

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि देश ने अपना एक महान बेटा खो दिया।

साधु वासवानी का पुणे में एसवीएम में निधन हो गया। वह कुछ दिनों से बीमार थे। तीन हफ्ते के बाद उनका सौवां जन्मदिन था जिसे बड़े पैमाने पर मनाने की तैयारी हो रही थी।

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