अजित पवार

महाराष्ट्र में सोमवार को उद्धव सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार हुआ। कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के खाते से कुल 36 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। अजित पवार एक बार फिर राज्य के उपमुख्यमंत्री बने हैं, महीने में दूसरी बार उन्होंने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली।

अजित पवार ने हालांकि फडणवीस के साथ मुलाकात के संबंध में सोमवार को बारामती में कहा कि राजनीति में कोई भी स्थायी दुश्मन नहीं होता। पवार ने एक मुस्कान के साथ कहा, "उन्हें आमंत्रित किया गया था।

फडणवीस ने आगे कहा कि अजित पवार ने हमसे संपर्क किया और कहा कि राकांपा(एनसीपी) कांग्रेस के साथ नहीं जाना चाहती। तीन पार्टियों की सरकार को नहीं चलाया जा सकता।

27 नवंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट में जमा किए गए शपथपत्र के मुताबिक विदर्भ सिंचाई विकास निगम (वीआईडीसी) के चेयरमैन अजित पवार को कार्यकारी एजेंसियों के कार्यों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है, क्योंकि पवार के पास कोई वैधानिक दायित्व नहीं है।

इधर अजित पवार से मिले बीजेपी प्रतिनिधि, उधर कांग्रेसमय हुआ सामना, महाराष्ट्र में "कुछ" तो पक रहा है!

साल 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अजित पवार एक अहम चेहरा बनकर सामने आए हैं। बीजेपी के खेमे में घुसकर एनसीपी में घरवापसी कर चुके अजित पवार के काम बार बार आशंका पैदा कर रहे हैं।

चार तटस्थ विधायकों में राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के विधायक राजू पाटिल का भी नाम शामिल है। गौरतलब है कि, शिवाजी पार्क में आयोजित उद्धव ठाकरे की शपथ ग्रहण समारोह में भाई राज ठाकरे भी पहुंचे थे।

फडणवीस ने कहा कि, जिस तरह से शपथ ली गई उस पर भी मुझे आपत्ति है। जिसके बाद स्पीकर ने कहा कि सदन के बाहर क्या हुआ उस पर बात नहीं करनी चाहिए। उसके बाद फडणवीस ने कहा कि मुझे संविधान पर बात करने का अधिकार है।

भाजपा अभी भी रेस से बाहर नहीं है और विधानसभा स्पीकर पद के लिए भाजपा ने अपना उम्मीदवार उतार दिया है। जहां कांग्रेस ने नाना पटोले को अपना उम्मीदवार बनाया है। तो वहीं भाजपा ने किसन कथोरे को अपना प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा है।

अजित पवार अपनी गतिविधियों से राजनीतिक पंडितों को हैरान कर रहे हैं। इस मुलाकात को लेकर प्रदेश के सियासी गलियारों में अटकलबाजियों का दौर एक बार फिर से शुरू हो गया है। हालांकि सफाई देते हुए अजित पवार ने इसे शिष्‍टाचार भेंट बताया।