अथर्ववेद

प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी को लेकर राष्ट्र को सावधान किया है। उन्होंने अपने 25 मिनट के भावुक सम्बोधन में प्रत्येक नागरिक से सजगता की अपील की है। उन्होंने इस महामारी से निश्चिंत होकर घूमने को उचित नहीं बताया है।

आदिमकाल में राजा या राज्य व्यवस्था नहीं थी। राज्य संस्था का क्रमिक विकास हुआ है। अथर्ववेद में राज्य के जन्म और विकास का सुन्दर वर्णन है। बताते हैं “पहले विराट (राजा-राज्य रहित) दशा थी, इस में विकास हुआ। गार्हृपत्य संस्था (परिवार-कुटुम्ब) आई।

काम कामनाओं का बीज है। यह प्रकृति में सर्वव्यापी है। प्राकृतिक है। प्रकृति की सृजनशक्ति है। प्रत्येक शक्ति का नियमन भी होता है। नियमविहीन शक्ति अराजकता में प्रकट होती है। फिर काम को विराट शक्ति जाना गया है।

अथर्ववेद में जीवन के सभी पक्ष हैं। ऋग्वेद, यजुर्वेद में वैज्ञानिक विषयों का भी दर्शन है। सामवेद गीत प्रधान है लेकिन अथर्ववेद में उपलब्ध विज्ञान की व्यवहार पद्धति भी है।

नई दिल्ली। तीर्थ भारत की आस्था है। लेकिन भौतिकवादी विवेचकों के लिए आश्चर्य हैं। वैसे इनमें आधुनिक विज्ञान के तत्व...