अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

इससे पहले कोरोनावायरस (Coronavirus) के कारण अमेरिका (America) ने चीन (China) के लिए नई ट्रैवल एडवाइजरी की थी। इस दौरान यहां यात्रा की सलाह नहीं दी जा रही थी।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाइनीज ऐप TikTok को लेकर और सख्त हो गए हैं। उन्होंने इस वीडियो शेयरिंग ऐप को लेकर बड़ी धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अगर 15 सितंबर तक चीनी कंपनी को किसी अमेरिकी कंपनी ने नहीं खरीदा तो अमेरिकी मार्केट से ये ऐप बाहर कर दी जाएगी और इसका 'धंधा' बंद कर दिया जाएगा।

कंपनी ने कहा, "माइक्रोसॉफ्ट राष्ट्रपति की चितांओं के महत्व को अच्छे से समझता है। एक सम्पूर्ण सुरक्षा रिव्यू और अमेरिका व यहां की निधि को एक बेहतर आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए टिकटॉक की खरीदारी करने के लिए हम प्रतिबद्ध है।"

भारत के बाद अब अमेरिका भी चीन पर बड़ी 'डिजिटल स्ट्राइक' कर सकता है। चीन से कई मसलों पर नाराज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राह पकड़ रहे हैं।

दरअसल अमेरिका में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ तथा मॉडर्ना इंक द्वारा विकसित कोविड-19 टीके का अंतिम चरण का परीक्षण शुरू हो गया है जिसमें लगभग 30 हजार अमेरिकी भाग ले रहे हैं। अंतिम चरण का परीक्षण अमेरिका में विभिन्न स्थानों पर सोमवार को शुरू हुआ।

इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चाइनीज शॉर्ट वीडियो एप टिकटॉक के खिलाफ कैंपेन शुरू कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने बकायदा टिकटॉक के खिलाफ फेसबुक और इंस्टाग्राम पर विज्ञापन जारी किया है।

भारत-चीन गतिरोध पर ट्रंप की यह बेमन की गई प्रतिक्रिया उनकी हाल की उन टिप्पणियों से बिलकुल अलग है जिसमें उन्होंने कोविड-19 महामारी के प्रसार में चीन की भूमिका, हांगकांग में मानवाधिकारों के हनन, बौद्धिक संपदा की चोरी, व्यापार में हेरफेर को लेकर चीन को काफी सख्त संदेश दिए थे और साथ ही चीन की विशेष व्यापार स्थिति को खत्म करने के आदेश पर हस्ताक्षर भी किए थे।

इस बीच कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कोविड वैक्सीन को लेकर बड़ी घोषणा कर दी है।

चीन ने कहा कि हांगकांग उसका आंतरिक मामला है और अमेरिका इसमें दखल देने से पहले सोच-समझ ले। बता दें कि वैसे ही दोनों देशों में कोरोना संक्रमण को लेकर तनावपूर्ण रिश्ते बने हुए हैं।

बता दें कि सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारत, चीन और अन्य एशियाई देशों पर पड़ा था। भारत से सबसे ज्यादा छात्र अमेरिकी की टॉप ​यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए हर साल अमेरिका जाते हैं।