अयोध्या फैसला

अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवादित जमीन पर रामलला का दावा मान्य है। इस जमीन पर मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार करने के लिए केंद्र सरकार को तीन महीने में ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया गया है। केंद्र सरकार ही ट्रस्ट के सदस्यों का नाम निर्धारित करेगी।

यानी कोर्ट का फैसला राम मंदिर के पक्ष में गया है और अब केंद्र सरकार को आगे की रूपरेखा तय करनी है। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अयोध्या मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि रामलला न्यायिक संपत्ति है ना कि राम जन्मभूमि।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने यह फैसला सर्वसम्मति से दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अयोध्या मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि अयोध्या में बुनियादी ढांचा इस्लामी नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अयोध्या मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा को जमीन देने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला गलत था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 में विवादित भूमि पर फैसला सुनाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को आयोध्या भूमि विवाद पर अपने फैसले में कहा कि हिंदुओं की इस बात का स्पष्ट सबूत है कि हिंदू मान्यता के अनुसार राम का जन्म विवादित स्थान पर हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अयोध्या मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि इस बात के सबूत हैं कि अंग्रेजों के आने से पहले हिंदू राम चबूतरा, सीता रसोई की पूजा करते थे।

भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने शनिवार को कहा कि इस बात के स्पष्ट सबूत हैं कि हिंदू मानते हैं कि भगवान राम विवादित स्थान पर पैदा हुए थे। उन्होंने यह बात खचाखच भरे अदालत कक्ष में अयोध्या भूमि विवाद का एकमत फैसला पढ़ते हुए कही।

अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार से कहा है कि, नरेंद्र मोदी सरकार तीन महीने के अंदर स्कीम लाए और ट्रस्ट बनाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, यह ट्रस्ट अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करेगा।

अयोध्या फैसला आने के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागववत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। उन्होंने कहा कि, हम सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हैं। यह मामला दशकों से चल रहा था और यह सही निष्कर्ष पर पहुंच गया है।

अयोध्या मामले पर शनिवार को फैसला सुना रहे सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की पीठ के अध्यक्ष प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई ने कहा कि मामले का फैसला पीठ के सभी सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से लिया जाएगा।