इमरान खान

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान में 27.3 फीसदी बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने स्कूल का मुंह नहीं देखा है। इनमें 55 फीसदी यानि करीब दो करोड़ 25 लाख, लड़कियां शामिल हैं।

आईएचसी ने बुधवार को पार्क लेन और फर्जी खातों के मामले में जरदारी को दो करोड़ पाकिस्तानी रुपये के जमानत बॉन्ड के बाद मेडिकल आधार पर जमानत दी थी।

भारतीय संसद द्वारा मंजूर नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) की आड़ में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर भारत के खिलाफ राग अलापा है। उन्होंने कहा है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत 'हिंदू वर्चस्ववाद एजेंडा' (हिंदू सुपरमेसिस्ट एजेंडा) की तरफ बढ़ रहा है।

पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री व पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के पूर्व सलाहकार हाफिज ए.पाशा ने कहा कि पीटीआई सरकार के पहले साल के समाप्त होने तक 80 लाख लोग पहले ही गरीबी की श्रेणी में चले गए हैं।

एक अदालत में सुनवाई के बाद हुमा की मां नगीना यूनुस ने पाकिस्तान में हो रहे अत्याचारों को लेकर कहा कि क्या पाकिस्तान में अपहरण और धर्म परिवर्तन ही उनका भविष्य है।

ट्रायल रन के उद्घाटन पर राजनीति का दखल इस हद तक रहा कि कहा जा रहा है कि इस अवसर पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को आमंत्रित किया गया था लेकिन उन्होंने 'व्यस्तताओं के कारण' आने में असमर्थता जताई।

इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के अधिकारियों ने ब्रिटिश न्यूज चैनल स्काइ न्यूज से इस बात की पुष्टि की। अधिकारियों ने बताया कि यूके में कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद गुरुवार दोपहर 28 वर्षीय उस्मान का शव एक पैसेंजर प्लेन में लादा गया जो शुक्रवार सुबह पाकिस्तान पहुंचा।

ब्रिटेन के अधिकारियों को लिखे पत्र में पाकिस्तानी सरकार ने कहा है कि शरीफ पाकिस्तान में विभिन्न मामलों में बहुत सारे आरोपों का सामना कर रहे हैं और उन्हें एक मामले में दोषी भी ठहराया गया है

भारत की विदेश नीति के आगे पाकिस्तान के होश फाख्ता है। पाकिस्तान इस कदर घबराया हुआ है कि भारत के पीछे पीछे चलने में ही अपनी भलाई समझ रहा है। भारत के विदेश मंत्री ने सबसे पहले श्रीलंका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति से मुलाकात की तो पाकिस्तान से भी रहा नहीं गया।

इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। सत्तारूढ़ पार्टी की हालत पाकिस्तान में आसमान छूती महंगाई और बिगड़ती अर्थव्यवस्था से पार पाने की तमाम असफल कोशिशों के बीच आंदोलनों में फंसकर और भी बुरी हो गई है।