ऋग्वेद

प्राण (Life) से जीवन है। प्राण से प्राणी है। प्राण दिखाई नहीं पड़ते। इसके बावजूद प्राण का अस्तित्व (Existence of life) है और प्राण के कारण ही जीव का अस्तित्व है। प्रश्नोपनिषद में कहा गया है कि सहस्त्रों किरणों वाला, सैकड़ों रुपों वाला समस्त जीवों का प्राण सूर्य उदित हो रहा है। यहां सूर्य संसार का प्राण है।

लोक (World) की व्याप्ति बड़ी है। सामान्यतया प्रत्यक्ष विश्व (Direct world) को लोक कहते हैं। लेकिन भारतीय परंपरा (Indian tradition) में कई लोकों की चर्चा है।

ऋग्वेद के प्रति पूरे एशिया महाद्वीप में विशेष प्रकार का आदरभाव है। अमेरिकी विद्वान भी वेदों के प्रति उत्सुक हैं। ब्लूमफील्ड ने अथर्ववेद का अनुवाद किया है। जर्मन विद्वान मैक्समुलर ने ऋग्वेद का भाष्य किया है। भारत के लिए वेद वचन ईश्वर की वाणी हैं।

शिव भारतीय देव अनुभूति के निराले देवता हैं। बाकी सब देव हैं। शिव महादेव हैं। वैदिक देव सोम वनस्पति के राजा हैं। शिव अपने मस्तक पर सोम धारण करते हैं। पौराणिक शिव के गले में सांपों की माला है। वे विषपायी भी हैं। ऋग्वेद के देवता हैं रूद्र। वे तीन मुंह वाले हैं। रूद्र, 'त्रयम्बकं यजामहे सुगंन्धिं पुष्टि वर्धनम्'-पोषण संवर्धन करते हैं।

प्रकृति आलस्य नहीं करती। प्रकृति की शक्तियां निरंतर सक्रिय रहती है। सूर्य आलस्य नहीं करते। पृथ्वी प्रतिपल नृत्यमगन है और चंद्र भी। सोम और चन्द्र पर्याय भी माने जाते हैं। चन्द्रमा विराट पुरूष का मन कहा गया है। मन कभी आलस्य नहीं करता। मन सतत् सक्रिय रहता है। ऋग्वेद अथर्ववेद में सोमलता का उल्लेख है।

अथर्ववेद भारतीय अनुभूति का मधुरस है। निस्संदेह इसके पूर्व ऋग्वेद में दर्शन और विज्ञान के ज्ञान अभिलेख हैं, प्रकृति के प्रति गहन जिज्ञासा है। मनुष्य को आनंदित करने वाली जीवनदृष्टि है।

घर आनंद है, घर में होना अपनत्व में रहना है। बच्चे बाहर खेलने जाते हैं, खेलने के बाद घर लौट आते हैं। हम सब पूरे दिन बाहर काम करते हैं, काम के बाद घर लौट जाते हैं।

प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी को लेकर राष्ट्र को सावधान किया है। उन्होंने अपने 25 मिनट के भावुक सम्बोधन में प्रत्येक नागरिक से सजगता की अपील की है। उन्होंने इस महामारी से निश्चिंत होकर घूमने को उचित नहीं बताया है।

देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते हैं। कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता है। हिंदू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उड़ाई गयी की हिन्दूओं  के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं

कालचिंतन भारतवासियों का प्रिय विषय रहा है। ऋग्वेद के नासदीय सूक्त में दिन रात्रिविहीन दशा का उल्लेख है। काल की धारणा में दिन और रात्रि समय के ही चेहरे हैं। ऋषि के अनुसार तब न रात थी