ऋषि

सविता सूर्य ही हैं। सूर्य किरणें स्वर्णिम होती है। सविता देव का मण्डल 1 सूक्त 35 में स्वर्ण जोड़कर सुंदर मानवीकरण हुआ है। कहते हैं, “सविता देव ‘हिरण्याक्ष’ स्वर्ण आखों - दृष्टि वाले हैं।

सभी प्राणी बोलते है। अनेक पक्षी साथ-साथ बोलें तो कलरव। बोली अच्छी लगे तो कहते हैं कि पक्षी गीत गा रहे हैं। कोयल को बहुधा गायक कहा जाता है। सही बात कोयल ही जानती होगी कि वह गा रही है या किसी परिस्थितिवश बड़बड़ा रही है। कौवे खूब बोलते हैं। हम उनके प्रवचन को ‘‘कांव कांव’’ कहते हैं। मेढक भी बोलते हैं।

नई दिल्ली। तीर्थ भारत की आस्था है। लेकिन भौतिकवादी विवेचकों के लिए आश्चर्य हैं। वैसे इनमें आधुनिक विज्ञान के तत्व...

नई दिल्ली। आरके स्टूडियो राज कपूर द्वारा बनाए गया था। 70 साल पुराना आर के स्टूडियो के बिकने की खबर...