एनडीटीवी

एनडीटीवी की जानी-मानी पत्रकार निधि राजदान (Nidhi Razdan) के साथ एक ऐसा वाकया हुआ है जिसको सुनकर आप भी अपने कानों पर भरोसा नहीं कर पाएंगे। साथ ही आपको बता दें कि निधि ने अपने सोशल मीडिया के जरिए ही अपने साथ हुआ हादसे का खुलासा किया है।

रवीश कुमार (Ravish Kumar) का अप्रेल 2015 का एक आलेख उनके चैनल की वेबसाइट पर उनकी कलम से लिखी और उनकी ही अपनी रिपोर्ट जब आप देखेंगे तो आपको समझ में आ जाएगा कि दूसरे मीडिया संस्थानों को गोदी मीडिया कहकर संबोधित करनेवाले कुमार कैसे अपना एजेंडा सरकार के खिलाफ कैसे चला रहे हैं। रवीश की 2014 से पहले और 2014 के बाद की रिपोर्ट देखकर आपको समझ में आ जाएगा की उनको सत्ता या सरकार से नहीं, उन्हें कृषि कानून के पास होने से नहीं, उन्हें सीएए के कानून बनने से नहीं, उन्हें तीन तलाक पर कानून बनाए जाने से नहीं, उन्हें घाटी से धारा 370 और 35 ए के हटाए जाने से नहीं बल्कि परेशानी नरेंद्र मोदी और सत्ता के सिंहासन पर उनके होने से परेशानी है।

Delhi Riots : दिल्ली पुलिस(Delhi Police) का कहना है कि, "कपिल मिश्रा(Kapil Mishra) के पूरे बयान के रिकॉर्ड पर आ जाने से आहत एंकर ने असली व्हिसल ब्लोअर(Whistle Blower) को नजरअंदाज करते हुए दर्शकों को गुमराह करने का प्रयास किया है।"

कपिल मिश्रा को लेकर एक फेक न्यूज एनडीटीवी की तरफ से प्रसारित किया गया जिसके बाद चैनल को इस पूरे प्रकरण पर सोशल मीडिया पर सफाई देनी पड़ी।

सीबीआई की प्राथमिकी में कहा गया कि एनडीटीवी को 8 सितंबर 1988 को निगमित किया गया और प्रणॉय राय, राधिका राय व नारायण केवीएल राव (सेवानिवृत्त आईआरएस अधिकारी) इसके पूर्णकालिक निदेशक हैं, जबकि विक्रमादित्य चंद्रा सीईओ-सह-पूर्णकालिक निदेशक हैं।

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