एसीबी

27 नवंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट में जमा किए गए शपथपत्र के मुताबिक विदर्भ सिंचाई विकास निगम (वीआईडीसी) के चेयरमैन अजित पवार को कार्यकारी एजेंसियों के कार्यों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है, क्योंकि पवार के पास कोई वैधानिक दायित्व नहीं है।

एसीबी ने साफ कर दिया है कि जो 9 मामलों की जांच बंद की गई है उससे अजित पवार का कोई संबंध नहीं है। इसके साथ ही एसीबी ने अपने पत्र में ये भी लिखा है कि, अन्य 24 मामलों की जांच जारी है।

एसीबी ने 70,000 करोड़ रुपए के सिंचाई घोटाले में अजित पवार को क्‍लीनचिट दी है। राज्य सरकार के सूत्रों की मानें तो जिन मामलों में अजित पवार को क्लीन चिट दी गई हैं इन मामलों से उनका संबंध नहीं है।

वेबसाइट ईएसपीएनक्रिकइंफो ने सिमंस के हवाले से लिखा, "मैं उस समय घर (लंदन) पर था। नहीं मुझे नहीं पता था। मुझे कोई वजह भी नहीं बताई गई। यह एसीबी और चयनकर्ताओं का फैसला था।"