कश्मीर

पाकिस्तानी राजदूत (Pakistani Ambassador) मोइन-उल-हक (Moin-ul-haq) चीनी मीडिया (China) में लगातार भारत (India) के खिलाफ कश्मीर (Kashmir) पर झूठ फैला रहे हैं। इसपर भारत ने उन्हें चेतावनी दी है।

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच आज सुबह मुठभेड़ शुरु हुई। इस एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने एक आतंकी मार गिराया।

बता दें कि घोर आर्थिक तंगी झेल रहे पाकिस्तान को उबारने के लिए इमरान सरकार ने वर्ष 2018 में सऊदी अरब से 6.2 अरब डॉलर यानी करीब 46 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इस उधार में 3.2 अरब डॉलर यानी करीब 24 हजार करोड़ रुपये की राशि का तेल कर्ज में देने का प्रावधान किया गया था।

मलेशिया के पूर्व पीएम ने कहा, ‘भारत के साथ कश्मीर पर मेरे बयान के चलते रिश्ते खराब हुए। लेकिन, उसके अलावा संबंध बहुत अच्छे थे, यहां तक कि मेरे नेतृत्व में भी रिश्ते अच्छे थे।’

बुधवार को जब पाकिस्तान के विदेशमंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कश्मीर मुद्दे को लेकर सऊदी अरब के नेतृत्‍व वाले ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्‍लामिक कंट्रीज (OIC) को धमकी दी। उन्होंने कहा कि कि मैं ओआईसी से कहना चाहता हूं कि विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक हमारी अपेक्षा है।

कश्मीर पर तुर्की के बयान का भारत ने कड़ा जवाब दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 को लेकर बीते दिनों तुर्की की ओर से किए गए बयान को तथ्यात्मक रूप से गलत, पक्षपातपूर्ण और गैजरूरी बताया है।

एलओसी पर जारी विवाद के बीच कश्मीर को लेकर पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के खिलाफ राग छेड़ दिया है। सोमवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और रक्षा मंत्री परवेज खटक नियंत्रण रेखा के दौरे पर पहुंचे।

भारतीय रेलवे अपने नाम एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करने जा रही है। बता दें कि कश्मीर में इंडियन रेलवे भारत का पहला केबल रेल ब्रिज बना रहा है। कटरा-बनिहाल रेलवे ट्रैक पर देश का पहला केबल रेल पुल बन रहा है।

कश्मीर के बडगाम के चिटगाम इलाके में आतंकवादियों ने ग्रेनेड हमला किया है। आतंकियों ने अंडर बैरल ग्रेनेड लाउंचर से आर्मी कैंप को निशाना बनाया लेकिन गनीमत रही कि ग्रेनेड कैंप के बाहर गिरा।

कलकत्ता के सुप्रसिद्ध परिवार में जन्मे श्यामा प्रसाद जी का व्यक्तिगत जीवन शिक्षा, राजनीति और लोकसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सफलताओं से जड़ा हुआ था, परन्तु भारत के स्वतंत्र हो जाने के पश्चात भी एक देश में ‘दो निशान, दो विधान, दो प्रधान’ के नियम की उपस्थिति उन्हें चुभती थी।