कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी

राहुल ने कहा, "कोविड-19 के कारण, आज हिंदुस्तान में तूफान आया हुआ है, सबसे ज्यादा चोट गरीब जनता को लगी है। मजदूरों को हजारों किलोमीटर पैदल भूखा-प्यासा चलना पड़ा और करोड़ों लोगों को रोजगार देने वाले एमएसएमई एक के बाद एक कर बंद हो रहे हैं।"

बता दें कि 1964 में नेहरू का 75 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। उन्होंने 1947 में भारत को मिली स्वतंत्रता के बाद से 1964 में निधन होने तक भारत के प्रधान मंत्री के रूप में कार्य किया।

राहुल ने यह भी कहा कि जब तक पारदर्शिता नहीं होगी, उस समय तक इस मुद्दे पर कुछ बोलना अच्छा नहीं होगा। उन्होंने कहा, "अगर मेरे पास अधिक जानकारी आती है तो मैं इस मामले पर अधिक जानकारी साझा करूंगा।"

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "दो महीने पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि हम 21 दिनों तक कोरोनावायरस (कोविड -19) के खिलाफ युद्ध लड़ने जा रहे हैं और अब 60 दिन हो गए हैं।"

राहुल ने इस वीडियो में मजदूरों के भविष्य के बारे में सवाल उठाए हैं। राजधानी दिल्ली के आनंद विहार बस अड्डे से लेकर देश के विभिन्न हिस्सों के प्रवासी मजदूरों का वीडियो शामिल है। वीडियों में सुखदेव विहार में मजदूरों के साथ राहुल गांधी की बातचीत का वीडियो भी शामिल हैं।

लॉकडाउन के बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पैदल घर वापसी कर रहे प्रवासी मजदूरों से मुलाकात की है। उन्होंने शनिवार को दिल्ली के सुखदेव विहार फ्लाईओवर के पास मजदूरों से मुलाकात की। इस दौरान राहुल गांधी ने फुटपाथ पर बैठकर उनसे बातचीत की और उनकी समस्याएं भी जानीं।

बता दें कि कांग्रेस पार्टी ने शनिवार को ट्विटर पर 2 मिनट 18 सेकंड का एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो संदेश में मनमोहन सिंह, पार्टी पूर्व प्रमुख राहुल गांधी, पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और कई अन्य शीर्ष नेताओं ने सरकार के फैसले पर निशाना साधा।

इससे पहले राहुल गांधी ने मंगलवार को एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए ट्वीट किया, 'आख़िर हिंदुस्तान का ग़रीब कब जागेगा? आप भूखे मर रहे हैं और वे आपके हिस्से के चावल से सैनिटाइजर बनाकर अमीरों के हाथ की सफ़ाई में लगे हैं।'

राहुल गांधी ने संसद परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "बीते रोज मैंने 50 सबसे बड़े विलफुल डिफॉल्टरों के बारे में एक सवाल पूछा था। तो प्रक्रिया है कि यदि आप कोई प्रश्न पूछते हैं तो आप को एक पूरक प्रश्न करने की अनुमति दी जाती है।"

अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर वैसे तो कांग्रेस हमेशा मोदी सरकार पर निशाना साधती रही है लेकिन जब उसके खुद के नेता इस आजादी का फायदा उठाकर जनता द्वारा चुने गए प्रधानमंत्री के लिए अपशब्दों का प्रयोग करते हैं तो कांग्रेस आलाकमान चुप्पी साध लेती है।