केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय

हर्षवर्धन ने यह भी कहा कि आरटी-एलएएमपी परीक्षण में तीव्र, सटीक और लागत प्रभावी है इसे स्वदेशी घटकों के साथ किया जा सकता है और इसे न्यूनतम विशेषज्ञता और इंस्ट्रूमेंटेशन के साथ स्थापित किया जा सकता है।

2019 में डेढ़ महीने तक चले आम चुनाव में थकान भरी कवायद के बाद परिणाम आने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ पहुंचे थे और उन्होंने भगवान शिव का रूद्राभिषेक कर उनकी आराधना की थी।

2019 में आम चुनाव से ठीक पहले देश के लगभग हर मंच पर विपक्षी एकता साफ नजर आ रही थी। इन विपक्षी दलों का सिर्फ और सिर्फ एक मकसद था किसी तरह नरेंद्र मोदी सरकार को सत्ता में दोबारा लौटने से रोकना।

नरेंद्र मोदी सरकार 1.0 में सियासी ताज सजने तक पार्टी की कमान भले राजनाथ सिंह के हाथ हो लेकिन सरकार गठन के बाद से पार्टी की कमान अमित शाह के मजबूत हाथों में आ गई।

सरकार के गठन के बाद जिस तरह से ताबड़तोड़ फैसले लिए गए उसने एक साल के मोदी सरकार 2.0 के कार्यकाल में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ और ऊंचा कर दिया।

जहां एक तरफ पूरी दुनिया कोरोनावायरस के कहर से त्राहिमाम कर रही है वहीं नरेंद्र मोदी सरकार की सफल नीतियों और इस दिशा में किए गए पूर्वनियोजित प्रयासों का नतीजा है कि देशभर में इसका कहर वैसा नहीं बरपा है जैसा पूरी दुनिया भारत के बारे में अनुमान लगा रही थी।

पदभार संभालने के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि मुझे पता है कि वैश्विक संकट के समय में मैं इस कार्यालय में प्रवेश कर रहा हूं। अगले 2 दशकों में कई स्वास्थ्य चुनौतियां होंगी। इन चुनौतियों से हम सब मिलकर लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि भारत मौजूदा वक्त में कोरोना से दृढ़ संकल्प के साथ लड़ रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के कार्यकारी (एग्जीक्यूटिव) बोर्ड के अगले चेयमैन बनने जा रहे हैं।

दिल्ली सरकार के आदेश के मुताबिक मौत के बाद मृतक का कोरोना सैंपल नहीं लिया जा सकेगा। अगर जांच के दौरान डॉक्टर्स को इस बात का शक होता है कि मृतक को कोरोना था, तब ऐसी स्थिति में मृत शरीर को सस्पेक्ट कोरोना डेडबॉडी माना जा सकता है।

कोरोना के संक्रमण को रोकने और उसके प्रसार पर नजर बनाए रखने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा है कि वे हर जिले में सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस (SARI) यानी सांस लेने में समस्या और इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियों (ILI) वाले करीब 250 लोगों की जांच करें।