केंद्र सरकार

एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (समायोजित सकल राजस्व) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों और दूरसंचार विभाग के रवैए पर नाराजगी जताई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह केंद्र सरकार में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डोनर) राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) व प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष मामलों के राज्यमंत्री हैं।

निर्भया केस में दिल्ली हाईकोर्ट के सामने केंद्र सरकार ने दोषियों को अलग-अलग फांसी देने की अर्जी लगाई थी। जिसको लेकर फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।

केंद्र सरकार ने नागरिकता कानून के विरोध में दिल्ली में हुए प्रदर्शनों का कच्चा चिट्ठा सामने रखा है। इसके मुताबिक नागरिकता कानून के खिलाफ दिल्ली में अब तक कुल 66 विरोध प्रदर्शन हुए। इस मामले में कुल 11 केस दर्ज किए गए हैं।

सर्वे के अनुसार, इन कारकों की वजह से केंद्र सरकार के आर्थिक प्रदर्शन से लगभग 47 प्रतिशत लोगों ने नाखुशी जाहिर की। आर्थिक मोर्चे पर केंद्र सरकार के प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में 46.4 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि यह उम्मीद से भी बदतर रहा।

सर्वे के मुताबिक, 56.4 फीसदी लोगों ने कहा कि वे मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार से बहुत अधिक संतुष्ट हैं, 23.8 फीसदी ने कहा कि वे 'कुछ हद तक संतुष्ट' हैं और सिर्फ 19.8 फीसदी ने कहा कि वे 'संतुष्ट नहीं' हैं। पूर्वोत्तर जोरदार तरीके से भाजपा का बना हुआ है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार के नई दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास से सुरक्षा हटाए जाने को बदले की राजनीति करार देते हुए राकांपा और शिवसेना ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

केंद्र सरकार ने राम मंदिर से जुड़े ट्रस्ट को बनाने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस सिलसिले में बातचीत पूरी हो चुकी है। ट्रस्ट में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों की संख्या ज्यादा होने की उम्मीद है।

मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने रविवार काे भाजपा द्वारा सीएए के समर्थन में दशहरा मैदान में आयाेजित सभा पर निशाना साधा। पटवारी ने कहा कि केंद्र सरकार देश को असल मुद्दों से भटकाने में लगी है। बेरोजगारी और देश के जीडीपी पर बात करने की बजाय वे दूसरे मुद्दाें पर डिबेट करवाना चाहती है। जितने प्यार से जनता माेदी जी काे लेकर आई है, उतने ही प्यार से विदा भी कर देगी।

जम्मू-कश्मीर में कई संगठनों की ओर से यह मांग उठाई गई थी। उन्हें डर था कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म करने और जम्मू-कश्मीर के विभाजन के बाद शैक्षणिक संस्थानों में नौकरियों, जमीनों और सीटों को लेकर हंगामा शुरू हो सकता है।