कोविड-19

सेसडर्मा लेबोरेटरीज के सीईओ और संस्थापक डॉ. गेब्रियल सेरानो सनमीग्ल ने कहा कि कंपनी जल्द ही इस संबंध में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) से संपर्क करेगी और बताएगी कि 75 रोगियों को पूरी तरह से ठीक करने में कैसे सफलता मिली।

मिसाल के तौर पर राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की मक्कासर ग्राम पंचायत को लें। यहां हर दिन साफ-सफाई अभियान चलता है। सड़कों पर सोडियम हाइड्रोक्लोराइड का छिड़काव होता है। यहां गांव के हर-घर मास्क और सैनिटाइजर दिया गया है। खास बात है कि जिनके घर मवेशी हैं तो उन्हें चारा भी दिया जा रहा।

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के नागफनी थाने के हाजी नेब की मस्जिद इलाके में गई मेडिकल टीम पर हमला कर दिया गया है। इतना ही, उनके साथ गई 108 मेडिकल एंबुलेंस पर पथराव भी किया गया।

लॉकडाउन के बीच 14 अप्रैल की शाम मुंबई के बांद्रा रेलवे स्टेशन पर 1500 से ज्यादा लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी, जिसके बाद पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। इसको लेकर मुंबई पुलिस ने अब एक शख्स को हिरासत में लिया है, जिसका नाम विनय दुबे है। आपको बता दें कि विनय दुबे को नवी मुंबई पुलिस ने हिरासत में लिया और मुंबई पुलिस को सौंप दिया है।

मुख्यमंत्री विजय रुपाणी, उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल और गृह मंत्री से मंगलवार को मुलाकात करने वाले अहमदाबाद के जमालपुर-खाड़िया के कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके बाद से राज्य में हड़कंप मच गया है। जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में कई और मंत्री भी मौजूद थे।

दरअसल एक समाचार पत्रिका ने इस बात का दावा किया है कि पीएम मोदी ने लॉकडाउन बढ़ाने से पहले कोविड-19 के 21 सदस्यीय वैज्ञानिकों के टास्क फोर्स से परामर्श नहीं किया और उनसे चर्चा के बगैर ही लॉकडाउन बढ़ाने का फैसला कर लिया।

मेडिकल टीम जब उस इलाके में पहुंची तो उन पर हमला कर दिया गया। जिसमें एंबुलेंस कर्मियों के साथ डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ घायल हैं। एंबुलेंस ड्राइवर का कहना है कि कुछ लोगों ने मेडिकल टीम और पुलिस पर पथराव किया, जो संभावित रूप से संक्रमित को लेने के लिए गए थे।

ढींगरा का आरोप है कि भोपाल गैस पीड़ितों के लिए बने भोपाल मेमोरियल हस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) को राज्य सरकार ने राज्य स्तरीय नोवल कोरोनावायरस (कोविड-19) उपचार संस्थान के रूप में चिन्हित किया है, जिससे इस अस्पताल में केवल कोविड-19 के मरीजों का ही उपचार हो रहा है।

डीसीपी ग्रेटर नोएडा राजेश कुमार सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में घटना की पुष्टि की है। डीसीपी के मुताबिक, घटना 14 अप्रैल रात के वक्त दया नगर गांव में घटी। इस सिलसिले में पुलिस ने थाना जारचा में मामला दर्ज किया है।

याचिका में कहा गया था कि कोरोना के दौर में लोगों के इलाज के दौरान उन्हें कोरोना की चपेट में आने का अंदेशा बना रहता है। इसलिए इन्हें कोरोना से सुरक्षा संबंधी सभी चीजें मुहैया कराई जाएं। उनके परिवार को भी कोरोना से बचाव के सभी साधन उपलब्ध कराए जाएं।