चंद्रयान

विवाद खड़ा होने के बाद इसरो के चीफ एस. सोमनाथ ने फैसला किया है कि वो अपनी आत्मकथा ‘निलावु कुदिचा सिम्हंगल’ का अभी प्रकाशन नहीं करेंगे। इसरो चीफ सोमनाथ की इस आत्मकथा का हवाला देते हुए दक्षिण भारत के अखबारों में खबरें छपी थीं। जिनमें कुछ ऐसे मुद्दे उठे थे, जिनकी वजह से विवाद हो गया था।

धरती और सूरज के बीच 5 लैंग्रेंजियन प्वॉइंट हैं। इनमें से पहले प्वॉइंट पर आदित्य एल-1 यान को इसरो स्थापित करेगा। लैंग्रेंजियन प्वॉइंट वो जगह हैं, जहां धरती और सूरज के गुरुत्वाकर्षण बल मिलते हैं। इस तरह आदित्य एल-1 यान वहां एक जगह स्थिर रहेगा और सूरज का अध्ययन करता रहेगा।

धरती और सूरज के बीच दूरी करीब 15 करोड़ किलोमीटर है। अब आप ये जानना चाहते होंगे कि आखिर इसरो का आदित्य एल-1 यान धरती की कक्षा में रहकर भी तो सूरज का अध्ययन कर सकता था। फिर इसे 15 लाख किलोमीटर पर लैग्रेंज प्वॉइंट पर भेजने की जरूरत क्या है?

फिलहाल चांद पर विक्रम लैंडर के उतरने की जगह के नामकरण को लेकर सियासत के और गरमाने के आसार दिख रहे हैं। वहीं, बीजेपी लगातार पलटवार कर कह रही है कि जब साल 2008 में चंद्रयान-1 का प्रोब चांद की सतह पर गिराया गया था, तब यूपीए की केंद्र सरकार ने उस जगह का नाम जवाहर प्वॉइंट रखा।

ये पूछे जाने पर कि जब साल 2008 में केंद्र में कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के दौर में चंद्रयान-1 के प्रोब को चांद पर गिराया गया था, तब उस जगह का नामकरण जवाहरलाल नेहरू पर रखा गया था, राशिद अल्वी ये सफाई देते दिखे कि नेहरू जी ने ही इसरो की स्थापना विक्रम साराभाई के साथ मिलकर की थी।

मोदी ने इसरो वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की विज्ञान की ताकत, हमारी टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक स्वभाव का लोहा मान चुकी है। उन्होंने कहा कि आज देश का हर बच्चा आप में अपना भविष्य देख रहा है। इसरो वैज्ञानिकों से पीएम मोदी ने कहा कि आपने युवाओं को एक रास्ता दिखाया है।

Chandrayaan- 3: चंद्रयान 3, 24-25 अगस्त को चांद की सतह पर दस्तक देगा। इसके बाद अगले 14 दिनों तक ये रोवर लैंडर के चारों ओर 360 डिग्री में घूमेगा और कई परीक्षण करेगा। रोवर के चलने से चन्द्रमा की सतह पर इसके पहिए के जो निशान बनेंगे इसकी तस्वीर भी ये भेजेगा।

इसरो ने अब निजी कंपनियों के लिए स्पेस सेक्टर खोल दिया है। इसरो प्रमुख के सिवन का कहना है कि भारत की औद्योगिक बुनियाद को मजबूत बनाने में स्पेस सेक्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि इस सेक्टर में उन्नत अंतरिक्ष तकनीकों के साथ शामिल कुछ देशों में से भारत भी है।

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