जामिया मिलिया इस्लामिया

शरजील की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यामूर्ति संजीव खन्ना की पीठ के सामने दलील पेश की कि दिल्ली, असम, उत्तर प्रदेश, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में एक ही भाषण के आधार पर पांच प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने भी उनके मुवक्किल पर यूएपीए लगाया है।

गौरतलब है कि शरजील पर जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के मामले में राजद्रोह का मामला दर्ज किए गया था जिसके बाद से वो फरार हो गया था लेकिन दिल्ली पुलिस ने 28 जनवरी को बिहार के जहानाबाद से उसे गिरफ्तार किया था।

जामिया मिलिया इस्लामिया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के बाहर प्रदर्शन किया है। नाराज छात्रों का यह प्रदर्शन उत्तर पूर्वी दिल्ली में हो रही हिंसा को लेकर था।

विजुअल्स की जांच में पता चला है कि जो उपद्रवी हाथ में पत्थर लेकर पहले रेलिंग्स पर कूदते देखे गए, वहीं जामिया मिलिया इस्लामिया के रीडिंग रूम (लाइब्रेरी) में भी घुसे। ये विजुअल्स पुलिस के रीडिंग रूम में घुसने और लाठीचार्ज करने से पहले के हैं।

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय प्रशासन ने रविवार को कहा कि सोशल मीडिया पर 15 दिसंबर की रात की घटना का वायरल हो रहा वीडियो उन्होंने जारी नहीं किया है।

जामिया मिलिया इस्लामिया का जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी से कोई ताल्लुक नहीं है। यह कमेटी नागरिकता संशोधन कानून(सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर(एनआरसी) के खिलाफ जारी आंदोलनों को लीड कर रही है।

कश्यप ने कहा 'होम मिनिस्टर का काम होता है हमारी सुरक्षा, मीडिया ने हमारा बहुत नुकसान किया है। वो आईना बनना बंद हो गई है। मीडिया उनकी स्पीकर बन गई है।'

अब एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है इस वीडियो में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद नजर आ रहे हैं।

नागरिकता संशोधन कानून पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में 15 दिसंबर को हुई हिंसा के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट अब आगे की सुनवाई 29 अप्रैल को करेगा। बता दें, सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई जामिया हिंसा मामले में केंद्र सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है।

केंद्र सरकार ने नागरिकता कानून के विरोध में दिल्ली में हुए प्रदर्शनों का कच्चा चिट्ठा सामने रखा है। इसके मुताबिक नागरिकता कानून के खिलाफ दिल्ली में अब तक कुल 66 विरोध प्रदर्शन हुए। इस मामले में कुल 11 केस दर्ज किए गए हैं।