डब्ल्यूएचओ

दुनिया भर में कोरोनावायरस ने कहर मचा रखा है। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि दुनियाभर में 6 वैक्सीन का काम तीसरे पेज में पहुंच गया है।

दुनियाभर में कोरोना के कहर के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक और चेतावनी जारी की है। जिसके मुताबिक जरूरी नहीं कि एक वैक्सीन से कोरोना खत्म हो जाए।

दुनियाभर में कोरोना का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। विश्व में नोवल कोरोनोवायरस मामलों की कुल संख्या 1.72 करोड़ का आंकड़ा पार कर गई है। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस घातक महामारी को लेकर नई चेतावनी दी है।

पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस की चपेट में है। लाखों लोग इस घातक वायरस से मर रहे हैं। इसे अब तक की सबसे बड़ी महामारी कहा जा रहा है। ऐसे में तमाम देशों के वैज्ञानिक और डॉक्टर इस महामारी की वैक्सीन की जद्दोजहद में लगे हैं। लेकिन इसी बीच WHO ने दुनिया को एक बड़ा झटका दिया है।

क्या मच्छर कोरोनावायरस को ले जाते हैं और क्या वे इसे इंसानों तक पहुंचा सकते हैं? इन सवालों का जबाव शायद न में है। इस बारे में एक नए अध्ययन में खुलासा हुआ है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी इसकी तारीफ की है। डब्ल्यूएचओ ने धारावी का उदाहरण देते हुए कहा है कि राष्ट्रीय और वैश्विक एकजुटता के साथ आक्रामक कार्रवाई से महामारी को रोका जा सकता है।

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने मई में ही घोषणा की थी कि उनका देश विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ अपने संबंधों को समाप्त कर रहा है। ट्रंप ने तब कहा था, 'चीन का डब्ल्यूएचओ पर पूरा नियंत्रण है जो साल में केवल 40 मिलियन डॉलर का भुगतान करता है जबकि अमेरिका 450 मिलियन डॉलर देता है।'

32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने कोरोना महामारी (Covid-19) को लेकर एक ओपन लेटर लिखा था, जिसमें WHO पर भी सवाल उठाए गए थे। इन वैज्ञानिकों का दावा है कि कोरोनावायरस हवा के जरिए भी फैलता है लेकिन डब्ल्यूएचओ इसे लेकर गंभीर नहीं है

देश में कोरोना के प्रकोप को देखते हुए हो रही कोरोना की टेस्टिंग पर मंत्रालय ने कहा, ‘‘कोविड-19 की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय और राज्य सरकार के स्तर पर समन्वित प्रयासों के कारण लगातार उत्साहजनक परिणाम मिल रहे हैं।

डब्ल्यूएचओ के एक सर्वे के अनुसार 73 देशों ने चेताया है कि कोविड-19 महामारी के कारण उनके यहां एड्स की जीवनरक्षक दवाओं का स्टॉक ख़त्म होने वाला है। वहीं, 24 देशों ने कहा कि उनके यहां एड्स की ज़रूरी दवाएं या तो बहुत कम हैं या उनकी सप्लाई बुरी तरह बाधित हुई है।