दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हिंसा पर सुनवाई करने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस मुरलीधर का तबादला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट किया गया है। केन्द्र सरकार ने तबादले की अधिसूचना जारी कर दी है। इसे लेकर राजनीति गरमा गई है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले में हिंसा के संबंध में कई आदेश दिए और कहा कि 'हम एक बार फिर 1984 जैसे हालात शहर में नहीं बनने दे सकते।' न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर ने कहा, "हमें सचेत रहना होगा।"

संशोधित नागरिकता कानून(सीएए) को लेकर उत्तरपूर्वी दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में भड़की हिंसा में शामिल लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग करने वाली एक याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने सीएए के विरोध में चल रहे हिंसक प्रदर्शनों की सुनवाई के दौरान बड़ा संदेश दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि हिंसात्मक गतिविधियों में लगे हुए लोगों के खिलाफ कार्यवाही करने के मामले में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। उसके लिए कोर्ट के आदेश की जरूरत नहीं है।

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करने वाले और विरोध करने वालों के बीच में जारी हिंसा में अब तक करीब 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक पुलिस जवान भी शामिल है। इस मामले पर अब पुलिस ने देखते ही उपद्रवियों को गोली मारने का आदेश जारी कर दिया है।

गार्गी कॉलेज में हुई छेड़छाड़ की घटना की सीबीआई जांच की मांग वाली एक याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को नोटिस जारी कर एजेंसी से जवाब मांगा है। अदालत ने 30 अप्रैल तक केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब दाखिल करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में महिला अधिकारियों को सशस्त्र बलों में स्थायी कमीशन देने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा, "सेना में पुरुष और महिलाएं समान सैनिकों के रूप में काम करते हैं, ऐसे में लिग के आधार पर महिलाओं के साथ अलग व्यवहार वास्तव में पूरी सेना के लिए एक संघर्ष के समान है।"

निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस के एक दोषी अक्षय ठाकुर की दया याचिका राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने खारिज कर दी है। अक्षय ठाकुर ने शनिवार को राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी थी।

निर्भया केस में दिल्ली हाईकोर्ट के सामने केंद्र सरकार ने दोषियों को अलग-अलग फांसी देने की अर्जी लगाई थी। जिसको लेकर फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।

केंद्र सरकार ने नागरिकता कानून के विरोध में दिल्ली में हुए प्रदर्शनों का कच्चा चिट्ठा सामने रखा है। इसके मुताबिक नागरिकता कानून के खिलाफ दिल्ली में अब तक कुल 66 विरोध प्रदर्शन हुए। इस मामले में कुल 11 केस दर्ज किए गए हैं।